रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों से जबरन वसूली के आरोप में कार्रवाई, वरिष्ठ निरीक्षक सहित 13 जीआरपी अधिकारी निलंबित

मुंबई और ठाणे के प्रमुख स्टेशनों पर चल रहा था रैकेट

मुंबई और ठाणे के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों से जबरन वसूली और लूटपाट में संलिप्त पाए जाने के आरोप में राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक वरिष्ठ निरीक्षक सहित कुल 13 अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कदम हाल ही में सामने आई उन शिकायतों के बाद उठाया गया, जिनमें आरोप लगाया गया था कि कुछ पुलिस अधिकारी संगठित रूप से यात्रियों को निशाना बनाकर उनसे नकदी और कीमती आभूषण वसूल रहे थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह रैकेट मुंबई सेंट्रल, दादर, कुर्ला, बांद्रा टर्मिनस, बोरीवली, ठाणे, कल्याण और पनवेल जैसे प्रमुख स्टेशनों पर सक्रिय था और आरोपी अधिकारी मुख्य रूप से लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर करने वाले उन यात्रियों को निशाना बनाते थे जो अपने साथ बड़ी मात्रा में नकदी या कीमती सामान लेकर यात्रा करते थे। ऐसे यात्री आमतौर पर शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं, जिससे आरोपियों को इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देने में आसानी होती थी।

जांच से सामने आया है कि संदिग्ध अधिकारियों की कार्यप्रणाली सुनियोजित थी। वे सामान जांच चौकियों पर यात्रियों पर नजर रखते थे और जैसे ही उन्हें पता चलता कि किसी यात्री के पास नकदी या आभूषण हैं, उसे वरिष्ठ अधिकारी से मिलने के नाम पर रोक लिया जाता था। इसके बाद यात्री को प्लेटफॉर्म पर बने जीआरपी परिसर में ले जाया जाता था, जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे। वहां उससे यह लिखवाया जाता था कि उसके पास मौजूद नकदी और गहने उसी के हैं, लेकिन तुरंत बाद उसे कानूनी कार्रवाई की धमकी दी जाती थी। इस दबाव में यात्री को बड़ी रकम अधिकारियों को देनी पड़ती थी ताकि वह किसी तरह बिना परेशानी के आगे की यात्रा कर सके।

कुछ मामलों में तो स्थिति और गंभीर हो जाती थी, जहां यात्रियों के साथ मारपीट तक की गई। पिछले महीने राजस्थान के एक यात्री ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि वह अपनी बेटी के साथ मुंबई सेंट्रल स्टेशन से सफर कर रहा था। उसके पास लगभग 31,000 रुपये की नकदी थी, जिसमें से उसे मजबूरन 30,000 रुपये जीआरपी अधिकारियों को देने पड़े। इस घटना से व्यथित यात्री ने राजस्थान पहुंचने के बाद शिकायत दर्ज कराई, जिसे आगे की जांच के लिए मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया। इस मामले ने उच्चाधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया और आरोपियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।

एक वरिष्ठ जीआरपी अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आरोपों की पुष्टि हुई और इसी आधार पर संबंधित अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई विभागीय अनुशासन बनाए रखने और यात्रियों का विश्वास बहाल करने के लिए आवश्यक थी। साथ ही, उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे केवल उन्हीं अधिकारियों को अपने सामान की जांच के लिए अनुमति दें जो वर्दी में हों और जिनकी गतिविधियां सीसीटीवी कैमरों के सामने हों।

यह घटना न केवल मुंबई बल्कि पूरे राज्य में रेलवे सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। रोजाना लाखों यात्री मुंबई और ठाणे के स्टेशनों से गुजरते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में पर्यटक और व्यापारी शामिल होते हैं। उनके लिए रेलवे स्टेशन सुरक्षित स्थान माना जाता है, लेकिन इस तरह की घटनाओं ने आम यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। अब जीआरपी की ओर से किए गए निलंबन को जहां एक ओर सख्त कदम माना जा रहा है, वहीं यह भी उम्मीद की जा रही है कि आगे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए और अधिक कठोर निगरानी प्रणाली लागू की जाएगी।

जानकारों का मानना है कि रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा को लेकर यात्रियों को जागरूक करने के साथ-साथ तकनीकी निगरानी को भी मजबूत करना होगा। सीसीटीवी कैमरों का कवरेज सभी संवेदनशील स्थानों पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी यात्री को इस तरह के हालात का सामना न करना पड़े। इस बीच, निलंबित अधिकारियों पर विभागीय जांच भी जारी है और दोष साबित होने पर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी को न केवल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी बल्कि आंतरिक स्तर पर भी पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखनी होगी। यात्रियों से जबरन वसूली जैसे कृत्य न केवल कानून के खिलाफ हैं बल्कि इससे आम नागरिकों के भरोसे को भी गहरी चोट पहुंचती है। निलंबन की यह कार्रवाई जहां एक ओर चेतावनी के रूप में सामने आई है, वहीं यह संकेत भी देती है कि रेलवे स्टेशनों पर किसी भी तरह की अनुचित गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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