तेजस प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार, चौथा इंजन भी जल्द भारत आने की उम्मीद
नई दिल्ली/बेंगलुरु : भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से खिंची तनातनी और रक्षा सौदों में पैदा हुई अनिश्चितताओं के बीच आखिरकार एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक (GE) ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को तीसरे F-404 एविएशन इंजन की डिलीवरी कर दी है। यह इंजन भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजना, एलसीए तेजस, के उन्नत संस्करण मार्क-1ए के लिए बेहद अहम है। माना जा रहा है कि इस महीने के अंत तक चौथा इंजन भी भारत पहुंच सकता है। इस सप्लाई ने न केवल HAL को राहत दी है, बल्कि भारत की रणनीतिक और कूटनीतिक स्थिति को भी मजबूती प्रदान की है।
अगस्त में इंजन सप्लाई पूरी तरह रुकी रही
अगस्त माह भारत के लिए कठिन साबित हुआ था क्योंकि उस दौरान अमेरिका से एक भी इंजन की डिलीवरी नहीं हुई। इस देरी ने HAL के प्रोजेक्ट को गहरा झटका दिया था। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन सप्लाई में देरी का वास्तविक कारण केवल “ग्लोबल सप्लाई चेन” नहीं था, बल्कि भारत-अमेरिका संबंधों में आई खटास थी। विशेष रूप से “ऑपरेशन सिंदूर” में अमेरिका की नाराजगी और टैरिफ युद्ध ने इस खटास को और बढ़ाया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को “डेड इकॉनमी” तक कह डाला था और 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगा दिया था। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 31 अगस्त से 1 सितंबर तक हुए चीन दौरे और उसके बाद ट्रंप के बदलते तेवरों ने हालात में नरमी लाई। लगातार तीन बार भारत की तारीफ करने वाले ट्रंप ने भारत को “प्राकृतिक साझेदार” कहा। इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा कि भारत और अमेरिका अच्छे मित्र और स्वाभाविक साझेदार हैं। कूटनीतिक स्तर पर यह सकारात्मक संकेत भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
99 इंजन का सौदा, अब तक सिर्फ तीन डिलीवरी
भारत ने वर्ष 2021 में HAL के जरिए वायुसेना के लिए 83 एलसीए मार्क-1ए विमानों का ऑर्डर दिया था। इस सौदे की कुल कीमत लगभग 48 हजार करोड़ रुपये है। इन विमानों के लिए अमेरिका की GE कंपनी से 99 F-404 इंजन खरीदने का करार हुआ था। लेकिन अब तक केवल तीन इंजन ही भारत को मिल पाए हैं, जबकि अनुबंध के मुताबिक इस साल के अंत तक 12 इंजन मिलने थे। करीब दो साल की देरी ने HAL और भारतीय वायुसेना की योजनाओं पर असर डाला है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने सार्वजनिक रूप से इस देरी पर नाराजगी जाहिर की थी। उनका कहना था कि इंजन सप्लाई में हो रही बाधा से न केवल तेजस प्रोजेक्ट प्रभावित हो रहा है, बल्कि वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारी पर भी असर पड़ रहा है।
HAL ने बनाए दस तेजस मार्क-1ए, फायरिंग परीक्षण जल्द
इंजन की कमी के बावजूद HAL ने एलसीए तेजस मार्क-1ए के दस संस्करण तैयार कर लिए हैं। इस महीने इनके फायरिंग परीक्षण होने हैं। इस दौरान स्वदेशी तेजस से अस्त्र मिसाइल (बियॉन्ड विजुअल रेंज) और शॉर्ट रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल का परीक्षण किया जाएगा। यह परीक्षण HAL और वायुसेना के लिए निर्णायक साबित होगा। यदि सब कुछ योजना के अनुसार होता है तो वायुसेना को जल्द ही दो तेजस विमान सौंप दिए जाएंगे। तेजस मार्क-1ए का महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है कि यह न केवल भारत की रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाएगा बल्कि देश को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है। इंजन सप्लाई सुचारू हो जाने पर HAL का दावा है कि मार्च 2026 तक वायुसेना को 10 लड़ाकू विमानों की डिलीवरी कर दी जाएगी।
अतिरिक्त 97 तेजस की खरीद को मंजूरी
भारत सरकार ने हाल ही में वायुसेना के लिए 97 और स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी है। इससे HAL की जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं। हालांकि अमेरिका से इंजन सप्लाई में देरी का खतरा अभी भी बना हुआ है, लेकिन सरकार ने संकेत दिया है कि भारत इस प्रोजेक्ट को हर हाल में आगे बढ़ाएगा। यही वजह है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) भी इस पर कड़ी नजर रखे हुए है। जुलाई महीने में पीएमओ के प्रिंसिपल सेक्रेटरी पीके मिश्रा ने बेंगलुरु स्थित HAL की सुविधा का दौरा किया और पूरे प्रोजेक्ट की समीक्षा की।
अमेरिका की रणनीतिक मजबूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की ओर से इंजन सप्लाई में आई रफ्तार केवल तकनीकी नहीं बल्कि रणनीतिक मजबूरी भी है। भारत अब वैश्विक स्तर पर एक अहम शक्ति बन चुका है और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिका को भारत के सहयोग की जरूरत है। यही वजह है कि तमाम मतभेदों और टकरावों के बावजूद अमेरिका भारत के साथ रक्षा साझेदारी को कमजोर नहीं करना चाहता। रक्षा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ट्रंप प्रशासन भले ही सख्त बयानों और टैरिफ की आड़ में दबाव बनाने की कोशिश करे, लेकिन वास्तविकता यही है कि अमेरिका को भारत के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध मजबूत रखने होंगे। इंजन सप्लाई की बहाली इसी का उदाहरण है।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम
एलसीए तेजस प्रोजेक्ट केवल एक रक्षा सौदा नहीं बल्कि “आत्मनिर्भर भारत” अभियान का हिस्सा है। स्वदेशी लड़ाकू विमान के सफल संचालन से भारत न केवल आयात पर निर्भरता कम करेगा बल्कि आने वाले समय में रक्षा उपकरणों का बड़ा निर्यातक भी बन सकता है। HAL और DRDO के इंजीनियर लगातार इस प्रोजेक्ट को गति देने में जुटे हुए हैं। स्वदेशी अस्त्र मिसाइल का तेजस से परीक्षण भारत की मिसाइल और विमानन तकनीक की क्षमता का भी सबूत होगा।