उल्हासनगर : महाराष्ट्र सरकार की ओर से लगाए गए सख्त नियमों और बार-डांस पर पाबंदियों के बावजूद उल्हासनगर में बार माफिया कानून को ताक पर रखकर खुलेआम अश्लीलता परोस रहे हैं। डांस बारों के नाम पर न केवल अशोभनीय प्रदर्शन किया जा रहा है, बल्कि युवाओं को गलत राह पर धकेलने का गंभीर आरोप भी स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार उठाया जा रहा है। गुरुवार देर रात विठ्ठलवाडी पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो बारों पर छापा मारकर सात महिलाओं सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया और अश्लीलता परोसने वाले आयोजकों के खिलाफ मामला दर्ज किया।
पुलिस द्वारा मिली जानकारी के अनुसार रात करीब ढाई बजे विठ्ठलवाडी पुलिस ने कैम्प नंबर चार, श्रीराम चौक स्थित हंड्रेड डे और एपल नामक डांस बारों पर छापा मारा। यहां पर महिलाएं छोटे और तंग कपड़ों में ग्राहकों को लुभाने के लिए डांस करती पाई गईं। बताया जा रहा है कि इन बारों में देर रात तक अश्लील डांस जारी था और शराब परोसने के दौरान कानून की पूरी तरह अनदेखी की जा रही थी। कार्रवाई में हंड्रेड डे के मालिक तुलसी वासिता और मैनेजर बालेन्द्र तेज बहादुर सिंह पर मामला दर्ज किया गया, वहीं सात महिलाओं को भी हिरासत में लिया गया। इसी तरह एपल बार के संचालक और कर्मचारियों के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उल्हासनगर में इस तरह की गतिविधियाँ पकड़ी गई हों। नागरिकों के अनुसार पुलिस छापेमारी के बाद कुछ घंटे बार बंद रहते हैं, लेकिन कुछ ही समय बाद बार संचालक फिर से अपने पुराने धंधे में लग जाते हैं। नागरिकों का यह भी आरोप है कि कई बार छापेमारी केवल औपचारिकता साबित होती है और बार मालिक कानून के शिकंजे से बचने के लिए प्रभावशाली रसूख और पैसों का इस्तेमाल करते हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन बारों में देर रात तक शराब परोसना, महिलाओं को अशोभनीय कपड़े पहनाकर नचाना और ग्राहकों को उकसाने जैसे गंभीर अपराध सामने आते रहते हैं। सरकार द्वारा स्पष्ट रूप से डांस बारों के लिए तय किए गए मानकों का उल्लंघन यहां आम बात हो गई है। इस वजह से समाज के संवेदनशील वर्गों में आक्रोश भी गहराता जा रहा है।
उल्हासनगर के वरिष्ठ नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे प्रकरण पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि शहर का युवा वर्ग डांस बारों की चकाचौंध में फँसकर अपनी पढ़ाई और करियर से भटक रहा है। वहीं कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि बारों से होने वाली मोटी कमाई के चलते बार संचालक स्थानीय स्तर पर कई प्रभावशाली व्यक्तियों से सांठगांठ कर लेते हैं, जिससे उन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती।
इस बीच सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिरकार पुलिस बार-बार छापेमारी करने के बावजूद बार मालिकों के लाइसेंस रद्द क्यों नहीं करवा पाती। नागरिकों का मानना है कि केवल तात्कालिक कार्रवाई से समस्या का समाधान संभव नहीं है। जब तक बार मालिकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उनका कारोबार बंद नहीं किया जाएगा, तब तक यह गोरखधंधा चलता रहेगा और समाज पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता रहेगा।
वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने दोनों बारों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जांच जारी है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा दिलाई जाएगी। अधिकारियों ने यह भी अपील की कि यदि नागरिकों को इस तरह की किसी भी गतिविधि की जानकारी हो तो वे तुरंत पुलिस को सूचित करें।
महाराष्ट्र सरकार ने पहले ही डांस बारों पर सख्त प्रतिबंध लगाए हैं और उच्चतम न्यायालय ने भी इस विषय पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद उल्हासनगर और आसपास के क्षेत्रों में डांस बारों की आड़ में अश्लीलता परोसी जा रही है, जो न केवल कानून की अवमानना है बल्कि समाज की संस्कृति और नैतिकता के लिए भी गंभीर खतरा है।
अब देखना यह है कि विठ्ठलवाडी पुलिस की ताजा कार्रवाई के बाद क्या प्रशासन बार मालिकों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाता है या फिर यह मामला भी पिछली कार्यवाहियों की तरह कुछ दिनों में ठंडा पड़ जाएगा। फिलहाल इस कार्रवाई के बाद शहर में चर्चा का विषय यही बना हुआ है कि बार संचालकों पर आखिर कब तक नरमी बरती जाती रहेगी और क्या सरकार सचमुच इस पर अंकुश लगाने में सफल होगी।