ठाणे। ठाणे जिला शारदीय नवरात्रि उत्सव की तैयारियों में इस समय पूरी तरह डूबा हुआ है। आगामी 22 सितंबर से शुरू होने वाले इस नौ दिवसीय पर्व को लेकर पूरे जिले में उल्लास और उमंग का माहौल है। मां दुर्गा की आराधना और भक्ति में डूबने के साथ-साथ डांडिया और गरबा जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रम भी लोगों के बीच उत्सव का आकर्षण बढ़ा रहे हैं। प्रशासन और आयोजकों के अनुसार, इस वर्ष जिले में कुल 3,862 देवी की मूर्तियां और 7,532 कलश स्थापित किए जाएंगे। इतना ही नहीं, 590 सार्वजनिक और 500 निजी स्थानों पर गरबा और डांडिया का आयोजन किया जाएगा।
देवी की मूर्तियों और कलश स्थापना की तैयारियां
ठाणे जिले में नवरात्रि उत्सव हर वर्ष पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस बार भी भक्तों ने मूर्ति और कलश स्थापना की भव्य तैयारियां शुरू कर दी हैं। आंकड़ों के अनुसार, जिले में 3,862 स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित होंगी। इनमें से 608 सार्वजनिक और 3,254 निजी क्षेत्र शामिल हैं।
ठाणे मंडल – 108 सार्वजनिक और 231 निजी
भिवंडी – 96 सार्वजनिक और 186 निजी
कल्याण – 136 सार्वजनिक और 2,624 निजी
उल्हासनगर – 118 सार्वजनिक और 89 निजी
वागले इस्टेट – 150 सार्वजनिक और 124 निजी
इसके साथ ही कलश स्थापना की परंपरा भी उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस वर्ष 7,532 कलश स्थापित किए जाएंगे। इनमें से 46 सार्वजनिक क्षेत्र और 7,486 निजी क्षेत्र में रखे जाएंगे।
गरबा और डांडिया का उल्लास
नवरात्रि का सबसे लोकप्रिय आकर्षण डांडिया और गरबा होता है। जिलेभर में इस बार 590 सार्वजनिक और 500 निजी स्थानों पर रास-गरबा और डांडिया का आयोजन किया जाएगा। युवा वर्ग से लेकर बुजुर्गों तक सभी इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। पंडालों में देवी की प्रतिमा की स्थापना कर उसके चारों ओर घूमकर गरबा करने की परंपरा भी निभाई जाती है। इस बार 133 सार्वजनिक और 287 निजी क्षेत्रों में इस परंपरा को निभाया जाएगा। रात्रि जागरण और डांडिया-गरबा के आयोजनों से ठाणे जिला नौ दिनों तक सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहेगा। पारंपरिक परिधानों में सजे युवक-युवतियां मां दुर्गा की स्तुति में थिरकेंगे।
परंपरा और श्रद्धा का संगम
ठाणे जिले में नवरात्रि का महत्व गणेशोत्सव से कम नहीं है। यहां लोग मां दुर्गा की भक्ति को विशेष श्रद्धा और उत्साह से मनाते हैं। शिवसेना के दिवंगत जिला प्रमुख आनंद दिघे द्वारा शुरू किया गया ‘जय अंबे माँ सार्वजनिक नवरात्रि उत्सव’ ठाणे शहर के टेंभी नाका पर हर साल मुख्य आकर्षण रहता है। वहीं, कल्याण का दुर्गाडी मंदिर भी नवरात्रि में भक्ति और उत्साह का केंद्र बनता है।
रामलीला और रावण दहन का आयोजन
नवरात्रि केवल देवी की पूजा तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इस दौरान भगवान राम की लीलाओं का भी मंचन किया जाता है। इस वर्ष ठाणे जिले के भिवंडी, उल्हासनगर और वागले इस्टेट में रामलीला का आयोजन होगा। राम-रावण युद्ध के दृश्य और भगवान राम की विजयगाथा दर्शकों को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेश प्रदान करेगी। इसके साथ ही, दशहरे के दिन यानी दसवें दिन, पूरे जिले में 12 स्थानों पर रावण दहन किया जाएगा। विशाल पुतलों के दहन के साथ आतिशबाजी का अद्भुत नजारा इस आयोजन को चरम पर पहुंचाएगा और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देगा।
उत्सव का महत्व
नवरात्रि ठाणे जिले के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में विशेष स्थान रखती है। यहां हर वर्ग के लोग इस पर्व में एक साथ शामिल होते हैं। मूर्ति स्थापना, कलश पूजन, गरबा-डांडिया और रामलीला जैसे आयोजन केवल धार्मिक आस्था को ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा को भी मजबूत करते हैं।
ठाणे जिले की नवरात्रि इस बार भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास का अनोखा संगम बनने जा रही है। हजारों मूर्तियां, हजारों कलश, सैकड़ों गरबा-डांडिया आयोजन और रामलीला-रावण दहन से यह उत्सव पूरे जिले में भक्ति और उल्लास का माहौल बना देगा। नवरात्रि का यह पर्व केवल देवी की आराधना ही नहीं, बल्कि सामूहिक आनंद, परंपरा और सामाजिक एकता का भी उत्सव है, जो ठाणे जिले को फिर से जीवंत और ऊर्जावान बना देगा।