लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को एक बार फिर इतिहास और जनसंख्या संतुलन के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि भारत में हिंदुओं की आबादी वर्ष 1100 में लगभग 60 करोड़ थी, लेकिन विदेशी ‘आक्रांताओं’ के लगातार हमलों और अत्याचारों के कारण आज़ादी तक यह घटकर केवल 30 करोड़ रह गई। योगी ने संभल जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 1947 में हिंदू आबादी 45% थी, जो अब घटकर महज 15% रह गई है। मुख्यमंत्री के इस बयान ने न सिर्फ राजनीतिक हलचल पैदा की, बल्कि स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के अभियान को लेकर भी बहस छेड़ दी।
संभल का उदाहरण और दंगों की पृष्ठभूमि
सीएम योगी ने अपने भाषण में संभल जिले का जिक्र करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद से 2019 तक वहां 15 बार दंगे हुए। इन दंगों ने इलाके की तस्वीर बदल दी। जहां 1947 में हिंदू आबादी 45% थी, वहीं अब यह घटकर सिर्फ 15% रह गई है। मुस्लिम आबादी उसी दौरान 55% से बढ़कर 85% हो गई। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार दंगों, पलायन और “लव जिहाद” जैसी घटनाओं ने जनसंख्या के संतुलन को बिगाड़ दिया। योगी ने कहा, “संभल में जो हालात हुए, वह पूरे देश के लिए एक चेतावनी हैं। यह दिखाता है कि जब समाज विभाजित होता है और सुरक्षा तंत्र मजबूत नहीं होता, तब कैसे एक वर्ग को पलायन के लिए मजबूर होना पड़ता है।”
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि इस्लामी आक्रमणों से पहले भारत में हिंदुओं की आबादी लगभग 60 करोड़ थी। लेकिन 800-900 सालों तक चले हमलों, दासता, बीमारी और भूखमरी के कारण यह संख्या घटकर 1947 तक 30 करोड़ रह गई। उन्होंने कहा, “जब पूरी दुनिया में जनसंख्या बढ़ रही थी, तब भारत में हिंदुओं की संख्या घट रही थी। क्यों? क्योंकि आक्रांताओं ने न सिर्फ हमारी जनसंख्या कम की, बल्कि हमारी खेती, हमारे उद्योग और हमारी समृद्धि को भी नष्ट किया। लाखों लोग भूख से मरे, बीमारियों से मरे और यातनाओं से मरे। यही विदेशी दासता का असर था।”
300 साल पहले भारत की आर्थिक ताकत
सीएम योगी ने भारतीय समृद्धि का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज से 300 साल पहले भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। दुनिया के कुल औद्योगिक उत्पादन में भारत का हिस्सा 25% था। उन्होंने कहा, “भारत का मतलब आज का भारत ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेश भी है, जिसे हम वृहत्तर भारत कहते हैं। कृषि और उद्योग में भारत का कोई मुकाबला नहीं था। लेकिन विदेशी शासन और गलत नीतियों ने हमें गरीबी की ओर धकेल दिया।”
स्वदेशी का संदेश और विपक्ष पर हमला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में स्वदेशी का नारा बुलंद करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज भी कुछ लोग विदेशी मानसिकता से काम कर रहे हैं और समाज को जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर विभाजित कर रहे हैं। योगी बोले, “स्वदेशी अब सिर्फ खादी या नारे तक सीमित नहीं है। आज भाजपा सरकार सुई से लेकर समुद्री जहाज, फाउंटेन पेन से लेकर हवाई जहाज तक सब कुछ भारत में बना रही है। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मेक इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड’ का विजन देकर स्वदेशी की अवधारणा को वैश्विक पहचान दिलाई है।”
उन्होंने कहा कि हर भारतीय को स्वदेशी को अपने जीवन का हिस्सा बनाना होगा। “जिस उत्पादन में भारत के श्रमिक का पसीना और युवा शक्ति की प्रतिभा लगी हो, वही हमारे लिए स्वदेशी है।”
योगी आदित्यनाथ का यह बयान हिंदुओं की आबादी के घटने और ऐतिहासिक घटनाओं की व्याख्या पर केंद्रित था। उन्होंने संभल का उदाहरण देकर चेतावनी दी कि सांप्रदायिक दंगे और सामाजिक असंतुलन किस तरह से जनसंख्या और सामाजिक संरचना को प्रभावित कर सकते हैं। साथ ही, उन्होंने स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए विपक्ष पर हमला बोला।
इस बयान के बाद जहां भाजपा समर्थक इसे “सच्चाई की याद दिलाने वाला” बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे समाज को बांटने की राजनीति करार दे रहे हैं। लेकिन इतना तय है कि योगी का यह बयान आने वाले समय में राजनीतिक और सामाजिक बहस का अहम मुद्दा बनेगा।