दुर्लभ सर्जरी से बंदर के बच्चे को मिला जीवनदान

मुंबई। जानवरों की जिंदगी भी इंसानों की तरह अनमोल होती है, यह एक बार फिर साबित हुआ है। मुंबई के चेंबूर इलाके में घायल अवस्था में मिले बंदर के एक छोटे से बच्चे को पशु चिकित्सकों ने अपनी मेहनत और जज़्बे से नया जीवन दिया। चेहरे पर गहरी चोटें, आंख पर गंभीर असर और मुंह में छेद जैसी तकलीफों के बावजूद डॉक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी और दुर्लभ सर्जरी कर उसे मौत के मुंह से बाहर निकाला। आज वह बच्चा सुरक्षित है और धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा है।

घावों ने कर दिया था चेहरा खराब

चेंबूर स्थित भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीआरसी) परिसर से कुछ दिन पहले यह घायल बंदर का बच्चा मिला। रेस्क्यूइंग एसोसिएशन फॉर वाइल्डलाइफ (RAW) के सदस्य ने उसे बचाया और तुरंत पशु चिकित्सक डॉ. दीपा कट्याल के क्लिनिक में पहुंचाया। डॉ. कट्याल ने बताया कि जब बच्चा उनके पास लाया गया, तो उसकी हालत बेहद नाजुक थी। चेहरे और आंख पर गहरे घाव थे, जिनमें कीड़े पड़ चुके थे। चेहरा लगभग खराब हो चुका था और चोट की वजह से उसके मुंह में छेद हो गया था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि बच्चा जो भी खाना खाता, वह शरीर में जाने के बजाय घाव से बाहर निकल जाता था।

मुश्किल हालात में इलाज की शुरुआत

करीब डेढ़ महीने के इस बच्चे का वजन केवल 350 ग्राम था। इतने छोटे और कमजोर शरीर के लिए लगातार भोजन पहुंचाना बेहद जरूरी था। डॉक्टरों ने उसके शरीर में पाइप डालकर खाना देना शुरू किया। लेकिन घाव और दर्द से परेशान बच्चा आक्रामक हो गया और उसने पाइप खींचकर निकाल दी। इसके बाद फिर से नई पाइप लगाई गई। धीरे-धीरे वह खाना स्वीकार करने लगा और अब उसका वजन 50 ग्राम बढ़ चुका है।

डॉ. कट्याल बताती हैं कि शुरुआत में उसके जीवित रहने की संभावना बहुत कम थी। “हमारे लिए यह चुनौतीपूर्ण था। लेकिन हार मानने का सवाल ही नहीं था। धीरे-धीरे उसका शरीर प्रतिक्रिया देने लगा और अब उसकी हालत में सुधार है,” उन्होंने कहा।


चोट का कारण अब तक रहस्य

यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि बंदर के बच्चे को इतनी गहरी चोटें कैसे आईं। डॉक्टरों का कहना है कि हो सकता है चलते-फिरते कहीं टकराने से चोट लगी हो या किसी जानवर अथवा इंसान ने हमला किया हो। वहीं, यह भी माना जा रहा है कि वह अपने झुंड से अलग हो गया था। चोटों या आक्रामक स्वभाव की वजह से उसने समूह छोड़ दिया हो और अकेला भटक रहा हो।

उम्मीद की किरण बनी सर्जरी

विशेषज्ञों के मुताबिक, इतनी गंभीर चोटों और कमजोर शरीर के बावजूद इस तरह की सर्जरी बेहद दुर्लभ है। बंदर के बच्चे को जीवनदान मिलना पशु चिकित्सा विज्ञान के लिए भी एक बड़ी सफलता है। यह न सिर्फ डॉक्टरों की मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि हर जीव की जिंदगी कीमती है और उसे बचाना हमारी जिम्मेदारी है।

अभी लंबा है सफर

हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा अभी पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुआ है। उसकी देखभाल और इलाज में समय लगेगा। “वह धीरे-धीरे ठीक हो रहा है। अब वह खाना भी खुद से लेने लगा है। हमें उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में वह पूरी तरह स्वस्थ होकर फिर से सामान्य जीवन जी पाएगा,” डॉ. कट्याल ने कहा।

इंसानियत की मिसाल

यह घटना न सिर्फ चिकित्सकों की लगन को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि करुणा और समर्पण से किसी भी जीव को जीवनदान दिया जा सकता है। घायल बंदर के बच्चे को नया जीवन मिलने की यह कहानी पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है कि हमें हर जीव-जंतु के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार होना चाहिए।

Related posts

दोस्ती बनी दुश्मनी का कारण, 15 वर्षीय किशोर ने 17 साल के साथी की ली जान

उद्धव ठाकरे को लोकसभा में बड़ा झटका! छह सांसदों ने बनाया अलग गुट, शिंदे सेना में विलय की अटकलों से सियासत गरम

BEST कर्मचारियों की आर-पार की लड़ाई, आज से अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान