जब परदे की देवियां बनीं खलनायकाएं: सोनाक्षी सिन्हा का डार्क अवतार ‘जटाधारा’ में

जब परदे की देवियां बनीं खलनायकाएं: सोनाक्षी सिन्हा का डार्क अवतार ‘जटाधारा’ में

मुंबई | अपनी नई फिल्म ‘जटाधारा’ के जरिए सोनाक्षी सिन्हा सिनेमा में बिल्कुल नए अंदाज में नजर आने वाली हैं। इस बार वह नायिका की भूमिका नहीं निभा रही हैं, बल्कि एक पूरी तरह नकारात्मक और गहराई लिए किरदार में दिखाई देंगी। यह उनकी फिल्मी करियर की सबसे साहसी कोशिश मानी जा रही है। पहले उन्होंने ‘इत्तेफ़ाक’ (2017) और संजय लीला भंसाली की वेब सीरीज़ ‘हीरामंडी’ में ग्रे शेड वाले किरदार निभाए थे, लेकिन इस बार का डार्क अवतार दर्शकों के लिए चौंकाने वाला साबित हो सकता है।

फिल्म में सोनाक्षी के साथ सुधीर बाबू, दिव्या खोसला, शिल्पा शिरोडकर, इंदिरा कृष्णा और झांसी जैसे कलाकार नजर आएंगे। यह फिल्म हिंदी और तेलुगु—दोनों भाषाओं में रिलीज हो रही है। फिल्म का पहला गीत ‘धना पिशाची’ पहले से ही चर्चा में है और संगीत की रचना ज़ी म्यूज़िक कंपनी ने की है। निर्माण की कमान उमेश कुमार बंसल और निखिल नंदा समेत कई प्रोड्यूसर्स ने संभाली है।

सोनाक्षी सिन्हा के इस साहसी प्रयोग को फिल्म जगत में अब तक कई अभिनेत्रियों ने अपनाया है और सफलता भी हासिल की है। उदाहरण के तौर पर, विद्या बालन ने ‘भूल भुलैया’ में मंजुलिका का किरदार निभाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया था। उनकी गहरी नजरें और संवाद अदायगी आज भी लोगों को याद हैं। पिछले साल ‘भूल भुलैया 3’ में विद्या ने नकारात्मक शेड वाले किरदार के साथ जोरदार वापसी की।

तब्बू ने ‘अंधाधुन’ में सिमी के जटिल और नैतिक रूप से उलझे किरदार के जरिए दर्शकों को भावनात्मक तौर पर हिला दिया। वह न पूरी तरह खलनायिका थीं और न ही नायिका, लेकिन उनके शांत चेहरे के पीछे छुपी चालाकी ने उन्हें सिनेमा के सबसे यादगार विरोधी किरदारों में से एक बना दिया।

कोंकणा सेन शर्मा ने ‘एक थी डायन’ में रहस्यमयी आकर्षण और डर का अनोखा मिश्रण पेश किया। उनके प्रदर्शन ने किरदार को केवल डरावना नहीं बल्कि दिलचस्प और संवेदनशील बना दिया। वहीं, तापसी पन्नू ने ‘बदला’ में अपने किरदार नैना सेठी के सच-झूठ के खेल से दर्शकों को पूरी तरह बांध लिया। अमिताभ बच्चन जैसे दिग्गज सह-अभिनेता के सामने भी तापसी ने अपनी मौजूदगी से फिल्म में छाया बन गई।

मौनी रॉय ने ‘ब्रह्मास्त्र’ में क्वीन ऑफ डार्कनेस के रूप में दर्शकों के सामने आग और जुनून से भरा प्रदर्शन पेश किया। उनकी आंखों में लगी आग और चाल में सिहरन ने उन्हें आधुनिक सिनेमा की नई ‘विलेन क्वीन’ बना दिया।

अब सोनाक्षी सिन्हा भी ‘जटाधारा’ के जरिए इस प्रतिष्ठित पंक्ति में शामिल हो रही हैं। फिल्म का यह डार्क अवतार उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और साहसी कदम माना जा रहा है। दर्शकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि वे सोनाक्षी के इस रहस्यमयी और खलनायिका अवतार को कितनी सराहना देती हैं।

फिल्म की कहानी, गहन किरदार और रोमांचक प्लॉटलाइन के अलावा संगीत और विजुअल्स भी दर्शकों को आकर्षित करने के लिए तैयार हैं। ज़ी स्टूडियोज़ और प्रेरणा अरोड़ा के सहयोग से बनी यह फिल्म बड़े परदे पर अपने प्रभावशाली प्रदर्शन के लिए तैयार है। उम्मीद की जा रही है कि सोनाक्षी का यह नया अवतार उन्हें नई पहचान और सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा, ठीक वैसे ही जैसे कई दिग्गज अभिनेत्रियों ने अपने साहसी प्रयोगों के जरिए सिनेमा में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।

सोनाक्षी सिन्हा के इस किरदार के माध्यम से यह साफ संदेश जाता है कि भारतीय सिनेमा में नायिका सिर्फ नायक की सहायक या प्रियतम तक सीमित नहीं है, बल्कि वह खलनायिका के रूप में भी अपनी कला और प्रतिभा का बेजोड़ प्रदर्शन कर सकती है। ‘जटाधारा’ इस दृष्टि से सोनाक्षी के करियर की एक नई शुरुआत और साहसिक प्रयोग साबित होगी।

Related posts

दोस्ती बनी दुश्मनी का कारण, 15 वर्षीय किशोर ने 17 साल के साथी की ली जान

उद्धव ठाकरे को लोकसभा में बड़ा झटका! छह सांसदों ने बनाया अलग गुट, शिंदे सेना में विलय की अटकलों से सियासत गरम

BEST कर्मचारियों की आर-पार की लड़ाई, आज से अनिश्चितकालीन आंदोलन का ऐलान