मुंबई: महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) क्षेत्र में आरक्षित ओपन स्पेस पर स्लम रीडेवलपमेंट योजनाओं के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। यह सर्कुलर बॉम्बे हाईकोर्ट के 19 जून 2025 के आदेश के अनुपालन में जारी किया गया है, जिसमें ओपन स्पेस को संरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। सर्कुलर के अनुसार, ऐसी योजनाओं में कम से कम 35% क्षेत्र को पार्क, गार्डन या प्लेग्राउंड के रूप में विकसित और संरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
सर्कुलर, जो 10 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया, पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (PIL) नंबर 1152/2002 के आधार पर है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मुंबई के विकास नियंत्रण और प्रोत्साहन नियमावली-2034 के रेगुलेशन 17(3)(D)(2) के तहत स्लम रिहैबिलिटेशन प्रोजेक्ट्स में ओपन स्पेस को सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने निर्देश दिए थे कि 35% ओपन स्पेस एक सतत क्षेत्र में होना चाहिए, जो बिखरा हुआ न हो, और यह पब्लिक एमेनिटी के रूप में सभी के लिए खुला रहेगा। इसे किसी प्राइवेट ग्रुप या डेवलपर के लिए रिजर्व नहीं किया जा सकता।
मुख्य दिशानिर्देश:
– ओपन स्पेस का विकास: 35% क्षेत्र को पब्लिक पार्क के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें ग्रीन लैंडस्केपिंग, वॉकिंग ट्रैक्स, बेंच, बच्चों के प्ले इक्विपमेंट, फिटनेस जोन, लाइटिंग और ड्रेनेज शामिल होंगे। इसमें साइनेज लगाया जाएगा जो स्पष्ट करे कि यह पब्लिक स्पेस है।
– हैंडओवर और मेंटेनेंस: रिहैबिलिटेशन कंपोनेंट के ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिलने के 90 दिनों के अंदर ओपन स्पेस को BMC या संबंधित अथॉरिटी को सौंपना होगा। डेवलपर को मेंटेनेंस के लिए कैपिटल ग्रांट या कॉर्पस प्रदान करना होगा और तीन साल तक की जिम्मेदारी का अंडरटेकिंग देना होगा।
– मॉनिटरिंग: राज्य सरकार और स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) एक डेडिकेटेड मॉनिटरिंग कमिटी गठित करेगी। फील्ड ऑफिसर्स हर तिमाही रिपोर्ट SRA और शहरी विकास विभाग को सौंपेंगे, जिसमें ओपन स्पेस की मार्किंग, विकास, हैंडओवर और पब्लिक एक्सेस की जानकारी होगी। ये रिपोर्ट्स SRA और UDD की वेबसाइट पर अपलोड की जाएंगी।
– उल्लंघन पर कार्रवाई: यदि 65% से ज्यादा क्षेत्र पर निर्माण हुआ या ओपन स्पेस नहीं प्रदान किया गया, तो तत्काल सुधार और अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। 35% न्यूनतम आवश्यकता है, और इससे ज्यादा संरक्षण को प्रोत्साहित किया जाएगा।
– एनक्रोचमेंट रोकथाम: आरक्षित ओपन स्पेस पर नए एनक्रोचमेंट को रोकना होगा, और रिक्रिएशन ग्राउंड्स, प्लेग्राउंड्स आदि को नॉन-बिल्डेबल जोन माना जाएगा, सिवाय न्यायिक या वैधानिक अपवादों के।
सर्कुलर में कहा गया है कि BMC को वार्ड-वाइज ओपन स्पेस रिजर्वेशन की लिस्ट तैयार कर एक्शन प्लान शहरी विकास विभाग को सौंपना होगा। BMC और SRA संयुक्त रूप से एक मॉनिटरिंग सेल गठित करेंगे, जिसकी अध्यक्षता BMC के डिप्टी कमिश्नर करेंगे।
शहरी विकास विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी निर्मलकुमार पी. चौधरी द्वारा हस्ताक्षरित इस सर्कुलर की कॉपी BMC कमिश्नर और SRA के CEO को भेजी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम मुंबई के ग्रीन स्पेस को बचाने में महत्वपूर्ण होगा, जहां शहरीकरण के कारण ओपन एरिया तेजी से कम हो रहे हैं। हाईकोर्ट के आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने से शहरवासियों को बेहतर पर्यावरण और रिक्रिएशनल स्पेस मिल सकेगा।