श्रीराम जन्मभूमि में सप्त मंडप समेत सभी मंदिरों का निर्माण पूरा, ध्वजदंड और कलश भी स्थापित

अयोध्या में भव्य रामलला मंदिर का स्वरूप धीरे-धीरे साकार, पंचवटी क्षेत्र में सौंदर्यीकरण कार्य जारी

लखनऊ। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर में निर्माण कार्य अब लगभग अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। मुख्य श्रीराम मंदिर के साथ परकोटे के छह मंदिरों — भगवान शिव, श्री गणेश, बजरंगबली हनुमान, भगवान सूर्यदेव, मां भगवती, मां अन्नपूर्णा और शेषावतार — का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इन सभी मंदिरों पर ध्वजदंड और स्वर्णिम कलश भी स्थापित कर दिए गए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय ने सोमवार को जानकारी दी कि पूरे मंदिर परिसर का स्वरूप अब अत्यंत भव्य और दैदीप्यमान दिखाई दे रहा है।

चंपत राय के अनुसार, श्रीराम मंदिर के परकोटे में बने सप्त मंडप — महर्षि वाल्मीकि, वशिष्ठ, विश्वामित्र, अगस्त्य, निषादराज, शबरी और ऋषि पत्नी अहिल्या — का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो गया है। इन सातों मंडपों का वास्तु विन्यास भारतीय परंपरा और रामायणकालीन आस्था के अनुरूप किया गया है। संत तुलसीदास का मंदिर भी पूरी तरह तैयार हो चुका है, जिसमें जल्द ही उनकी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही श्रद्धा और सेवा के प्रतीक ‘गिद्धराज जटायु’ तथा परिश्रम और योगदान की मिसाल ‘गिलहरी’ की प्रतिमाएं भी मंदिर परिसर में स्थापित कर दी गई हैं।

महामंत्री ने बताया कि दर्शनार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट की ओर से सभी आवश्यक प्रबंध पूरे कर लिए गए हैं। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही, दर्शन व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े सभी तकनीकी कार्य संपन्न हो चुके हैं। मुख्य मंदिर में लाइटिंग, ध्वनि व्यवस्था, सुरक्षा नियंत्रण कक्ष और सीसीटीवी नेटवर्क को सक्रिय कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि वर्तमान में सड़कों और फ्लोरिंग पर पत्थर लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। भूमि सौंदर्यीकरण के तहत परिसर को हरियाली से आच्छादित किया जा रहा है। पंचवटी क्षेत्र में लगभग 10 एकड़ भूमि पर लैंडस्केपिंग, वृक्षारोपण और पुष्प सज्जा का कार्य अंतिम चरण में है। इस क्षेत्र में तुलसी, कदंब, बेल, पीपल और बड़ जैसे धार्मिक वृक्ष लगाए जा रहे हैं ताकि यह परिसर भक्तों के लिए आध्यात्मिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से पवित्र अनुभव प्रदान करे।

इसके अलावा, मंदिर परिसर की चारदीवारी का निर्माण भी लगभग साढ़े तीन किलोमीटर तक पूरा किया जा चुका है। बाउंड्रीवॉल के भीतर आने वाले हिस्सों में पाथवे और मार्ग तैयार किए जा रहे हैं ताकि दर्शनार्थियों को आसानी से आवागमन मिल सके।

ट्रस्ट की ओर से चल रहे अन्य कार्यों में ट्रस्ट कार्यालय, अतिथि गृह और सभागार का निर्माण भी शामिल है। चंपत राय ने बताया कि अतिथि गृह में आने वाले संत, विद्वान, अतिथि और मंदिर से जुड़े अधिकारी ठहरेंगे। वहीं सभागार में धार्मिक कार्यक्रमों, संवाद सत्रों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा।

अयोध्या में इस भव्य परियोजना के तहत केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि आसपास के पूरे क्षेत्र का विकास भी व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। सड़क चौड़ीकरण, विद्युत व्यवस्था, जलापूर्ति और स्वच्छता से जुड़े कार्य भी राज्य सरकार और ट्रस्ट के सहयोग से चल रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने बताया कि दर्शनार्थियों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और यातायात की विशेष योजना तैयार की गई है।

रामलला के मंदिर के निर्माण में प्रयुक्त हर पत्थर, मूर्तिकला और स्थापत्य भारतीय शिल्पकला की समृद्ध परंपरा को दर्शा रहा है। मंदिर का शिखर, गर्भगृह, सभामंडप और प्रवेश द्वार सभी पारंपरिक नागर शैली के अनुसार तैयार किए गए हैं। ध्वजदंडों पर लगाए गए कलशों को स्वर्ण रंग में मढ़ा गया है, जो दूर से ही मंदिर की भव्यता को और अधिक आकर्षक बनाते हैं।

महामंत्री ने बताया कि आने वाले महीनों में जब पंचवटी का कार्य पूर्ण हो जाएगा, तब पूरे परिसर का सौंदर्य और भी निखर उठेगा। साथ ही मंदिर परिसर में भक्तों के लिए पीने के पानी, शौचालय, विश्राम कक्ष, चिकित्सा सहायता केंद्र और प्राथमिक उपचार केंद्र जैसी सुविधाओं की भी व्यवस्था की जा रही है।

चंपत राय ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, श्रद्धा और एकता का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने कहा, “यह मंदिर करोड़ों लोगों की भावनाओं का केंद्र है, और हमें गर्व है कि हम इस युगांतकारी कार्य के साक्षी बन रहे हैं।”

सूत्रों के अनुसार, मंदिर के शेष सौंदर्यीकरण और बाहरी निर्माण कार्य आने वाले महीनों में पूर्ण कर लिए जाएंगे। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि परिसर भक्तों के स्वागत के लिए पूर्ण रूप से तैयार होगा। अयोध्या नगरी अब सचमुच रामराज्य की झलक देने लगी है — स्वच्छ सड़कों, जगमगाते मार्गों, भक्ति संगीत से गूंजते घाटों और मंदिरों की सुनहरी छटा के बीच।

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