मुंबई: महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के भीतर संभावित असहमति के संकेत बढ़ते नज़र आ रहे हैं। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा गायकवाड़ ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि कांग्रेस बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) के आगामी चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने की तैयारी कर रही है। उनके इस वक्तव्य ने न केवल एमवीए की समन्वय क्षमता पर सवाल खड़े किए, बल्कि मुंबई की सत्ता में कांग्रेस की महत्वाकांक्षाओं को भी नए सिरे से रेखांकित कर दिया।
मुंबई कांग्रेस की अहम बैठक में बोलते हुए गायकवाड़ ने पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से दृढ़ संकल्प लेने की अपील की—“बीएमसी में कांग्रेस का झंडा फिर से ऊंचा फहराना है। हमें सभी 227 सीटों पर मजबूती से तैयारी करनी होगी।” उन्होंने यह स्पष्ट किया कि पार्टी अब गठबंधन पर निर्भर रहने के बजाय अपने संगठन की ताकत के बल पर चुनाव लड़ना चाहती है।
बैठक में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव रमेश चेन्निथला, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। गायकवाड़ का यह बयान ठीक उस समय आया जब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) अध्यक्ष राज ठाकरे नगर निकाय चुनावों के लिए हाथ मिलाने पर विचार कर रहे हैं।
राज ठाकरे को लेकर कांग्रेस में विरोध
राज ठाकरे के उत्तर भारतीय प्रवासियों पर अतीत में दिए गए कड़े बयानों और उनकी आक्रामक राजनीति को देखते हुए कांग्रेस का एक बड़ा वर्ग एमवीए में एमएनएस को शामिल किए जाने के खिलाफ है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि ऐसा गठबंधन कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकता है। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में गायकवाड़ का ‘अकेले लड़ने’ का संदेश विशेष महत्व रखता है।
चेन्निथला का बड़ा संकेत—“फैसला स्थानीय इकाइयों का”
गायकवाड़ के बयान से पहले जब पत्रकारों ने AICC महासचिव रमेश चेन्निथला से पूछा कि क्या कांग्रेस बीएमसी चुनाव अकेले लड़ सकती है, तो उन्होंने कहा—“ऐसे निर्णय स्थानीय इकाइयों को लेने का अधिकार है।” इससे मुंबई कांग्रेस को यह संकेत मिला कि शीर्ष नेतृत्व स्थानीय भावनाओं और रणनीति को महत्व देने के पक्ष में है। वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि उन्होंने चेन्निथला को स्पष्ट रूप से बताया है कि कांग्रेस के नेता और जमीनी कार्यकर्ता स्वतंत्र रूप से या समान विचारधारा वाले छोटे संगठनों के साथ चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संगठनात्मक तैयारियों की उन्हें पूरी जानकारी दे दी गई है।
कार्यकर्ताओं को दो महीने का टार्गेट—मतदाता सूची पर पैनी नजर
गायकवाड़ ने पार्टी कैडर से कहा कि आगामी दो महीनों में उन्हें पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरना होगा। उन्होंने विशेष रूप से मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों, नए नाम जोड़ने और पुराने नाम हटाए जाने पर सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा—“अगर मतदाता सूची में हम चूक गए, तो चुनावी मैदान में हमारी मेहनत प्रभावित होगी।”
एमवीए की पृष्ठभूमि और मौजूदा स्थिति
कांग्रेस ने 2019 में राजनीति के सबसे बड़े उलटफेरों में से एक करते हुए अपने पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी शिवसेना के साथ मिलकर एनसीपी के साथ एमवीए गठबंधन बनाया था। लेकिन 2022-23 में शिवसेना और एनसीपी दोनों में विभाजन हुआ और शिंदे तथा अजित पवार गुट भाजपा के साथ सत्ता में आ गए।
इस राजनीतिक उथल-पुथल के बीच 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस मुंबई की छह सीटों में से सिर्फ दो पर जीत हासिल कर सकी, जबकि 36 विधानसभा सीटों में से उसे केवल दस सीटें मिलीं। कांग्रेस के कई नेताओं का मानना है कि सीट बंटवारे में शिवसेना (यूबीटी) का पलड़ा भारी रहने से पार्टी को नुकसान झेलना पड़ा।
अब बीएमसी चुनाव 2026 के लिए प्रस्तावित हैं, और यह निगम देश का सबसे अमीर निकाय माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस की ‘अकेले लड़ने’ की रणनीति पार्टी के लिए जोखिम भी है और मौका भी। मुंबई कांग्रेस के इस संकेत से स्पष्ट है कि आगामी बीएमसी चुनाव न केवल स्थानीय निकाय की लड़ाई होंगे, बल्कि महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति के स्वरूप को भी नया आकार देंगे। क्या कांग्रेस वास्तव में अकेले मैदान में उतरने का फैसला करेगी, या अंतिम समय में एमवीए में समझौता होगा—इसकी तस्वीर आने वाले महीनों में स्पष्ट होगी। लेकिन इतना तय है कि मुंबई की राजनीति अब तेज़ी से नई दिशा ले रही है।