गुंदवली से अंधेरी तक मेट्रो टिकट हो सकता है महंगा, महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र को भेजा किराया निर्धारण समिति गठन का प्रस्ताव

मुंबई। पश्चिमी उपनगरों की लाइफलाइन बन चुकी मेट्रो लाइन 2ए (दहिसर ईस्ट-अंधेरी वेस्ट) और लाइन 7 (दहिसर ईस्ट-गुंदवली) की यात्रा जल्द ही महंगी हो सकती है। महाराष्ट्र सरकार ने इन दोनों लाइनों के किराए में बढ़ोतरी के लिए सबसे अहम कदम उठाते हुए केंद्र सरकार को किराया निर्धारण समिति (फेयर फिक्सेशन कमिटी-एफएफसी) के गठन का प्रस्ताव भेज दिया है। राज्य मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और अब केंद्र की हरी झंडी का इंतजार है।

वर्तमान में इन दोनों लाइनों पर किराया मुंबई की किसी भी मेट्रो लाइन से सबसे कम है। 3 से 12 किलोमीटर तक की यात्रा के लिए सिर्फ 20 रुपये लगते हैं, जबकि वर्सोवा-घाटकोपर वाली लाइन-1 और आरे-बीकेसी वाली एक्वा लाइन-3 पर इसी दूरी के लिए 40 रुपये देने पड़ते हैं। अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों को आकर्षित करने के लिए शुरू में किराया जानबूझकर कम रखा गया था, लेकिन अब बढ़ती परिचालन लागत और कम राजस्व के कारण किराया बढ़ाना जरूरी हो गया है।

एमएमआरडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “लाइन 2ए और 7 का कुल लंबाई 35.1 किलोमीटर है और यह वेस्टर्न एक्सप्रेस हाईवे के समानांतर चलती है। अप्रैल 2022 में दोनों लाइनों का पूर्ण परिचालन शुरू हुआ था। शुरुआत में अनुमान था कि रोजाना करीब 9 लाख यात्री इन लाइनों का इस्तेमाल करेंगे, लेकिन वर्तमान में सप्ताह के दिनों में सिर्फ 2.65 लाख यात्री ही यात्रा कर रहे हैं। इससे महा मुंबई मेट्रो ऑपरेशंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमएमएमओसीएल) पर भारी वित्तीय दबाव पड़ रहा है।”

मेट्रो रेलवे (संचालन और रखरखाव) अधिनियम, 2002 के तहत हर चार साल में या असाधारण परिस्थितियों में किराए की समीक्षा अनिवार्य है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा तीन सदस्यीय किराया निर्धारण समिति का गठन किया जाना जरूरी है। इसमें एक अध्यक्ष (न्यायिक पृष्ठभूमि वाला) और दो सदस्य होते हैं। समिति को यात्रियों की संख्या, परिचालन खर्च, अन्य परिवहन साधनों के किराए, अनुमानित घाटा और यात्रियों की वहन क्षमता जैसे सभी पहलुओं की जांच करनी होती है। इसके बाद ही नया किराया स्लैब तय होता है।

अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल ही एमएमआरडीए ने किराया बढ़ाने का अनुरोध किया था, लेकिन केंद्र ने पहले एफएफसी गठन की शर्त रखी थी। अब राज्य सरकार ने औपचारिक प्रस्ताव भेजकर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। एक बार समिति बनने के बाद 3-6 महीने के भीतर नई दरें घोषित हो सकती हैं।

यात्रियों की प्रतिक्रिया मिली-जुली है। अंधेरी से दहिसर रोजाना आने-जाने वाले संजय मेहता कहते हैं, “शुरू में 20 रुपये में पूरी यात्रा सस्ती लगती थी, लेकिन अगर किराया 50-60 रुपये हो गया तो लोकल ट्रेन और बेस्ट बस फिर सस्ती पड़ेंगी।” वहीं बोरीवली की रहने वाली प्रिया शर्मा का कहना है, “मेट्रो में समय की बचत होती है और आराम भी। अगर किराया थोड़ा बढ़ भी जाए तो चल जाएगा, बशर्ते सर्विस में सुधार हो।”

ट्रेड विशेषज्ञों का मानना है कि किराया बढ़ोतरी अपरिहार्य है क्योंकि मेट्रो प्रोजेक्ट की लागत वसूली और रखरखाव के लिए स्थायी राजस्व मॉडल जरूरी है। हालांकि सरकार यह भी दावा कर रही है कि नई दरें भी अन्य मेट्रो लाइनों और शहरों की तुलना में प्रतिस्पर्धी रखी जाएंगी।

फिलहाल गुंदवली, अंधेरी, गोरेगांव, जोगेश्वरी, मलाड, कांदिवली और बोरीवली जैसे घने आबादी वाले इलाकों के लाखों नागरिक इस फैसले का इंतजार कर रहे हैं। केंद्र से मंजूरी मिलते ही किराया निर्धारण समिति का गठन होगा और उसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आखिर एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक की यात्रा कितने रुपये महंगी होने वाली है।

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