विशेष गहन पुनरीक्षण 2026 के तहत बड़ा फेरबदल, कुल मतदाता घटकर 17.31 लाख
स्थायी पलायन, मृत्यु और अनुपस्थिति बने मुख्य कारण
झुंझुनू | विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 के तहत राजस्थान के झुंझुनू जिले की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। पुनरीक्षण के दौरान जिले की मतदाता सूची से कुल 1,16,082 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके बाद जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 18,48,032 से घटकर अब 17,31,950 रह गई है। यह कटौती मुख्य रूप से उन मतदाताओं की है, जिनके गणना (गिनती) फॉर्म प्राप्त नहीं हो पाए थे या जो सत्यापन के दौरान अपात्र पाए गए।
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक नाम झुंझुनू विधानसभा क्षेत्र से हटाए गए हैं, जहां अकेले 20,280 मतदाताओं के नाम सूची से बाहर किए गए। वहीं, सबसे कम कटौती खेतड़ी विधानसभा क्षेत्र में दर्ज की गई है, जहां 11,211 नाम हटाए गए। अन्य विधानसभा क्षेत्रों में पिलानी से 16,770, सूरजगढ़ से 19,482, मण्डावा से 12,594, नवलगढ़ से 19,370 और उदयपुरवाटी से 16,375 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं।
जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. अरुण गर्ग ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने के पीछे तीन प्रमुख कारण सामने आए हैं। सबसे बड़ा कारण स्थायी पलायन है। जिले से 71,675 लोग स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर जा चुके हैं, जिसके चलते उनके नाम हटाए गए। इसके अलावा, 22,939 मतदाता मृत पाए गए, जबकि 14,528 मतदाता सत्यापन के दौरान दिए गए पते पर अनुपस्थित मिले। वहीं, 6,240 नाम दोहरी प्रविष्टि के कारण और 700 नाम अन्य कारणों से हटाए गए हैं।
पुनरीक्षण के साथ ही जिले में मतदान केंद्रों का भी पुनर्गठन किया गया है। जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, 1,200 से अधिक मतदाताओं वाले मतदान केंद्रों का पुनर्संयोजन किया गया है। इस प्रक्रिया के बाद अब जिले में कोई भी ऐसा मतदान केंद्र नहीं है, जहां 1,200 से अधिक मतदाता पंजीकृत हों।
निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के नाम सूची से हट गए हैं या जो नए नाम जुड़वाना चाहते हैं, उनके लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर दिया जा रहा है। यह प्रक्रिया 16 दिसंबर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक चलेगी। इस अवधि में पात्र नागरिक संबंधित बूथ लेवल अधिकारी या निर्वाचन कार्यालय में संपर्क कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं।
प्रशासन का कहना है कि इस पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, सटीक और अद्यतन बनाना है, ताकि आगामी चुनावों में केवल पात्र मतदाता ही अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।