ग्रामीणों का आक्रोश, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप, लगातार बढ़ रही घटनाओं से दहशत
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में छुट्टा सांडों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। बदायूं जिले के उसावां क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां लकड़ियां बीनने गई एक बुजुर्ग महिला पर सांड ने हमला कर उसे पटक-पटककर मार डाला। हैरान करने वाली बात यह रही कि सांड करीब दो घंटे तक महिला के शव के ऊपर बैठा रहा और किसी को पास नहीं आने दिया।
घटना की सूचना मिलते ही ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सैकड़ों ग्रामीण मौके पर जमा हो गए, लेकिन सांड के आक्रामक रवैये के कारण कोई भी पास जाने की हिम्मत नहीं जुटा सका। काफी प्रयासों के बाद ग्राम प्रधान के ट्रैक्टर की मदद से शोर-शराबा कर सांड को वहां से खदेड़ा गया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंचे उसावां थाना प्रभारी वीरपाल सिंह ने पुलिस टीम के साथ स्थिति का जायजा लिया और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया। पशु चिकित्सा विभाग के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीवीओ) डॉ. समदर्शी सरोज ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।
मृतका के बड़े बेटे राजवीर कश्यप ने बताया कि उनकी मां घर से सूखी लकड़ियां लाने के लिए अकेली निकली थीं। रास्ते में अचानक सांड ने हमला कर दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया। गुस्साए ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर प्रशासन से सांडों को पकड़ने और ठोस कार्रवाई की मांग की। सीवीओ द्वारा जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद ग्रामीणों का गुस्सा कुछ हद तक शांत हुआ।
ग्रामीणों का कहना है कि छुट्टा पशु, खासकर सांड, गांव और खेतों में काम करने वाले किसानों के लिए जानलेवा बनते जा रहे हैं। बदायूं जिले में इस समय 400 से अधिक निराश्रित सांड खुलेआम घूम रहे हैं। पशुपालन विभाग का दावा है कि नवंबर माह से अब तक 72 सांडों को पकड़कर बधिया कर गो-आश्रय स्थलों में भेजा गया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा भयावह बताई जा रही है।
कुंवरगांव, बिसौली, वजीरगंज, सहसवान, दातागंज, उसहैत और उसावां जैसे क्षेत्रों में सांडों के हमले लगातार सामने आ रहे हैं। हाल के महीनों में कई लोगों की जान जा चुकी है। 7 सितंबर को उघैती क्षेत्र में किसान रघुवीर की मौत हुई थी। 10 अक्टूबर को उसावां के नवीगंज गांव में 70 वर्षीय राजकुमार सिंह सांड के हमले का शिकार बने। 1 नवंबर को सिविल लाइन क्षेत्र के अन्नी गांव निवासी रघुवीर शर्मा (55) की जान गई। 15 नवंबर को कादरचौक क्षेत्र में जयराम (55) की मौत हुई। 1 दिसंबर को दातागंज के रोहारी गांव में रामनिवास को सांड ने मार डाला। 9 जनवरी को अलापुर क्षेत्र के बमनी गांव निवासी राजू की मौत हुई, जबकि 13 जनवरी को उसहैत क्षेत्र के इटौवा गांव की सुनीता भी सांड के हमले में जान गंवा बैठीं।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ग्रामीणों की मांग है कि छुट्टा पशुओं की धरपकड़ के लिए ठोस और प्रभावी अभियान चलाया जाए, ताकि निर्दोष लोगों की जान बचाई जा सके।