डिजिटल अरेस्ट का मायाजाल: रिटायर्ड महिला से 4.62 करोड़ की ठगी, 4 महीने तक दहशत में रखा

विशेष संवाददाता आजकल साइबर अपराधी केवल आपके बैंक खातों पर ही नहीं, बल्कि आपके मनोविज्ञान पर भी हमला कर रहे हैं। एक ताजा और दिल दहला देने वाले मामले में, जालसाजों ने एक वृद्ध महिला को महीनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के खौफ में रखकर उनसे 4.62 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड ठगी को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार, महिला ने डर के मारे अपनी जीवनभर की जमापूंजी—फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD)—समय से पहले तुड़वाकर अपराधियों के हवाले कर दी।

अक्टूबर से जनवरी तक चला ‘खौफ का खेल’

​पुलिस अधिकारियों ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि ठगी का यह सिलसिला अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ था। जालसाजों ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर महिला से संपर्क किया। उन्होंने महिला पर मनी लॉन्ड्रिंग और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गंभीर मामलों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया।

​पीड़िता को यह विश्वास दिलाया गया कि वह एक बड़ी जांच के दायरे में हैं और यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया, तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा। अपराधियों ने ‘स्काइप’ और अन्य वीडियो कॉलिंग ऐप्स के जरिए उन्हें चौबीसों घंटे निगरानी में रखा, जिसे साइबर अपराध की भाषा में ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है।

FD और RD तुड़वाकर ट्रांसफर किए पैसे

​अपराधियों का दबाव इतना अधिक था कि महिला पूरी तरह से उनके नियंत्रण में आ गई। अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच, महिला ने किस्तों में अपनी सारी बचत ठगों के बताए गए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी।

  • ​महिला ने बैंक जाकर अपनी कई फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तुड़वाईं।
  • ​मैच्योरिटी से पहले ही रिकरिंग डिपॉजिट (RD) का पैसा निकाला गया।
  • ​कुल मिलाकर 4.62 करोड़ रुपये ठगों के खातों में जमा किए गए।

ठगी का एहसास और पुलिस में शिकायत

​जनवरी के अंत में जब ठगों ने और पैसों की मांग की और महिला की आर्थिक क्षमता खत्म हो गई, तब उन्हें संदेह हुआ। अपनों से चर्चा करने के बाद उन्हें समझ आया कि वे एक सोची-समझी साजिश का शिकार हो चुकी हैं। इसके बाद उन्होंने साइबर सेल में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सावधान रहें, सुरक्षित रहें

​साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन कॉल या वीडियो कॉल पर किसी को ‘अरेस्ट’ नहीं करती और न ही पैसे की मांग करती है। यदि कोई आपको डराने की कोशिश करे, तो तुरंत स्थानीय पुलिस या 1930 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क करें।

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