भारतीय वायुसेना को मिलेगी बड़ी ताकत: 114 ‘मेक इन इंडिया’ राफेल फाइटर जेट डील को मंजूरी


करीब 3.25 लाख करोड़ की मेगा रक्षा परियोजना को डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की हरी झंडी, फ्रांस के साथ सरकार-से-सरकार समझौते की तैयारी

नई दिल्ली/मुंबई: फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आगामी भारत यात्रा से पहले भारत और फ्रांस के बीच एक बड़ी रक्षा डील को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। गुरुवार (12 फरवरी 2026) को रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 ‘मेक इन इंडिया’ राफेल लड़ाकू विमानों के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इस मेगा प्रोजेक्ट की अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो दुनिया के सबसे बड़े रक्षा सौदों में शामिल हो सकती है।

यह मंजूरी रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) की अहम बैठक में दी गई। इससे पहले पिछले महीने डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी थी, जो किसी भी बड़े रक्षा सौदे की प्रारंभिक प्रक्रिया मानी जाती है। अब यह प्रस्ताव आगे वित्त मंत्रालय और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

भारत में होगा निर्माण, बढ़ेगी स्वदेशी ताकत

सूत्रों के अनुसार, 114 राफेल विमानों में से करीब 16 को सीधे फ्रांस से खरीदा जा सकता है, जबकि बाकी विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इस परियोजना के तहत फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन किसी भारतीय कंपनी के साथ मिलकर देश में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट स्थापित करेगी। इन स्वदेशी राफेल विमानों में लगभग 60 प्रतिशत तक भारतीय हथियार और उपकरण लगाए जाने की संभावना है।

भारतीय वायुसेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव सामने आया था। 114 नए लड़ाकू विमानों से वायुसेना की 5 से 6 नई स्क्वाड्रन खड़ी की जा सकेंगी। वायुसेना की एक स्क्वाड्रन में आमतौर पर 18 से 20 विमान शामिल होते हैं। वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को मजबूत करने के लिए इस डील को बेहद अहम माना जा रहा है।

पहले भी हो चुकी हैं बड़ी राफेल डील

गौरतलब है कि वर्ष 2016 में भारत ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद का सौदा किया था, जिसकी कीमत करीब 59 हजार करोड़ रुपये थी। इसके अलावा पिछले वर्ष अप्रैल में नौसेना के लिए राफेल के 26 मरीन वर्जन (राफेल-एम) खरीदने का करार किया गया था। करीब 63 हजार करोड़ रुपये की इस डील के तहत इन विमानों को स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत पर तैनात किया जाएगा।

भारतीय वायुसेना फिलहाल जिन 36 राफेल विमानों का इस्तेमाल कर रही है, वे मिटयोर, मीका और स्कैल्प जैसी अत्याधुनिक मिसाइलों से लैस हैं। भविष्य में भारत में बनने वाले राफेल विमानों को स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों से भी सुसज्जित किया जा सकता है, जिससे रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार-से-सरकार समझौते की तैयारी

सूत्रों के मुताबिक, पिछली राफेल डील की तरह यह सौदा भी सरकार-से-सरकार (G2G) समझौते के तहत किया जाएगा। इस नई परियोजना के मंजूर होने पर भारतीय वायुसेना का पुराना एमआरएफए (मीडियम वेट फाइटर एयरक्राफ्ट) प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में जा सकता है, जिसमें अलग-अलग वैश्विक कंपनियों को टेंडर प्रक्रिया में शामिल करने की योजना थी।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ाने के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी मजबूती देगी। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों की 17 से 19 फरवरी के बीच प्रस्तावित भारत यात्रा से पहले इस परियोजना को मिली मंजूरी को रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जा रहा है।

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