बुलढाणा/परभणी: महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा है कि परभणी महापौर चुनाव में कांग्रेस ने गठबंधन धर्म निभाते हुए शिवसेना (उबाठा) का समर्थन किया और भाजपा को सत्ता से दूर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि इस चुनाव में शिवसेना (उबाठा) का महापौर और कांग्रेस का उपमहापौर चुना गया है।
मीडिया से बातचीत के दौरान सपकाल ने कहा कि इंडिया गठबंधन, महाविकास आघाड़ी, लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के उद्देश्य से कांग्रेस के सभी 12 नगरसेवकों ने शिवसेना (उबाठा) के उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। उन्होंने इसे गठबंधन की मजबूती और सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण बताया।
हालांकि, उन्होंने चंद्रपुर महानगरपालिका के घटनाक्रम पर नाराजगी भी जताई। उनके अनुसार, वहां शिवसेना (उबाठा) के आठ नगरसेवक होने के बावजूद उन्होंने भाजपा का समर्थन किया, जो राजनीतिक दृष्टि से गलत कदम था। सपकाल ने कहा कि इस फैसले को लेकर कांग्रेस के मन में कोई बदले की भावना नहीं है, क्योंकि यह पार्टी की संस्कृति के खिलाफ है, लेकिन ऐसी घटनाएं गठबंधन की भावना को कमजोर करती हैं।
उन्होंने बताया कि चंद्रपुर के संदर्भ में कांग्रेस नेताओं ने शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राऊत से भी चर्चा की थी और लगातार संपर्क बनाए रखा था। इसके बावजूद शिवसेना नेताओं की ओर से दिए गए बयान गठबंधन की भावना के अनुरूप नहीं थे।
सपकाल ने वंचित बहुजन आघाड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि वह कांग्रेस की सहयोगी पार्टी है। चंद्रपुर में उनके दो नगरसेवक अनुपस्थित रहे, जिसके बाद पार्टी ने उन पर कार्रवाई करते हुए निलंबित कर दिया और शहर अध्यक्ष के खिलाफ भी कदम उठाए। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर शिवसेना (उबाठा) ने अपने स्तर पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की, बल्कि इस घटनाक्रम का समर्थन किया, जिसे कांग्रेस किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगी।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परभणी में कांग्रेस के पास अपना महापौर बनाने का प्रस्ताव था, लेकिन पार्टी ने सत्ता की लालसा से ऊपर उठकर गठबंधन धर्म को प्राथमिकता दी। कांग्रेस ने शिवसेना (उबाठा) के साथ खड़े होकर समर्थन दिया, ताकि भाजपा को सत्ता में आने से रोका जा सके।
सपकाल ने कहा कि हाल की घटनाओं से यह स्पष्ट हुआ है कि कई बार शिवसेना (उबाठा) कांग्रेस के वोटों का लाभ लेती है, लेकिन बदले में समर्थन नहीं देती। उन्होंने कहा कि चंद्रपुर और परभणी की घटनाओं ने इस स्थिति को उजागर कर दिया है। इसके बावजूद कांग्रेस अपने सिद्धांतों पर कायम रहेगी और गठबंधन की मजबूती के लिए काम करती रहेगी।