मुंबई पुलिस ने लौटाई करोड़ों की जब्त संपत्ति, 490 शिकायतकर्ताओं को सोना, नकदी, वाहन और मोबाइल सहित ₹2.90 करोड़ का सामान सौंपा

मुंबई में अपराध पीड़ितों को राहत पहुंचाने की दिशा में मुंबई पुलिस के परिमंडल-10 ने एक सराहनीय पहल करते हुए बड़ी मात्रा में बरामद की गई संपत्ति उसके वास्तविक मालिकों को लौटाई। इस विशेष अभियान के तहत चोरी, गुमशुदगी, धोखाधड़ी और साइबर अपराध से जुड़े मामलों में जब्त किए गए सामान को विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद कुल 490 शिकायतकर्ताओं को सौंपा गया। लौटाई गई संपत्ति का कुल मूल्य लगभग 2 करोड़ 90 लाख 94 हजार रुपये बताया गया है।

यह संपत्ति हस्तांतरण कार्यक्रम सेवन हिल्स अस्पताल के ऑडिटोरियम हॉल में आयोजित किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में नागरिकों और पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के दौरान अंधेरी, एमआईडीसी, मेघवाड़ी, जोगेश्वरी, साकीनाका और पवई पुलिस थानों द्वारा अलग-अलग मामलों में बरामद किया गया माल संबंधित शिकायतकर्ताओं को सम्मानपूर्वक लौटाया गया। वर्षों की मेहनत से अर्जित अपनी खोई हुई संपत्ति वापस पाकर नागरिकों के चेहरों पर संतोष और राहत साफ दिखाई दी।

बरामद सामान में सोना-चांदी के आभूषण, नकद राशि, वाहन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल हैं। पुलिस द्वारा लौटाई गई संपत्ति में 351.5 ग्राम सोना, 13 किलो 770 ग्राम चांदी, 27 हीरे, 42 लाख 76 हजार रुपये नकद, 9 दोपहिया वाहन, 11 तीनपहिया वाहन, 1 चारपहिया वाहन और 442 मोबाइल फोन शामिल हैं। इसके अलावा साइबर धोखाधड़ी से जुड़े 9 मामलों में जब्त अन्य इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं भी नागरिकों को सौंपी गईं।

इस पूरे अभियान को देवेन भारती के मार्गदर्शन और परिमंडल-10 के पुलिस उपायुक्त दत्ता नलावडे के नेतृत्व में सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया। संबंधित पुलिस थानों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने लगातार प्रयास कर विभिन्न मामलों में जब्त संपत्ति को सुरक्षित रखा और जांच पूरी होने के बाद उसे असली मालिकों तक पहुंचाया।

कार्यक्रम के दौरान अपनी खोई हुई वस्तुएं वापस पाने वाले लोगों ने पुलिस की मेहनत और तत्परता की खुलकर सराहना की। कई नागरिकों ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनकी गुम हुई संपत्ति दोबारा मिल पाएगी, लेकिन पुलिस के प्रयासों ने उनका विश्वास मजबूत किया है।

पुलिस अधिकारियों ने इस मौके पर कहा कि नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ उनकी संपत्ति की रक्षा करना भी उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। अपराध पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे। इस पहल से न केवल पीड़ितों को राहत मिली है, बल्कि समाज में पुलिस के प्रति विश्वास भी और मजबूत हुआ है।

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