15 फरवरी को मनाई जा रही महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आध्यात्मिक चेतना का विराट उत्सव है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आने वाली यह पावन रात्रि भगवान शिव की आराधना, आत्मचिंतन और साधना का अद्भुत अवसर प्रदान करती है। मान्यता है कि इसी रात्रि भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था, वहीं एक अन्य मत के अनुसार इसी दिन शिव ने सृष्टि के कल्याण हेतु तांडव किया था। इसीलिए यह रात्रि जागरण, उपवास और शिवभक्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
शिव—विनाश और सृजन के देव
भगवान शिव को संहारक कहा जाता है, परंतु उनका संहार विनाश के लिए नहीं, बल्कि नवसृजन के लिए होता है। वे त्रिदेवों में तीसरे देव हैं—ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता, विष्णु पालनकर्ता और शिव संहारकर्ता। शिव का स्वरूप जितना सरल है, उतना ही गूढ़ भी। जटाओं में बहती गंगा, मस्तक पर चंद्रमा, कंठ में विष और गले में सर्प—ये सभी प्रतीक जीवन के गहरे दर्शन को दर्शाते हैं।
शिव का नीलकंठ रूप हमें यह सिखाता है कि संसार की नकारात्मकता को आत्मसात कर भी हम शांत और संतुलित रह सकते हैं। महाशिवरात्रि इसी शिवत्व को अपने भीतर जागृत करने का पर्व है।
महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले हलाहल विष को शिव ने अपने कंठ में धारण कर लिया था, जिससे सृष्टि का विनाश टल गया। यह घटना शिव के त्याग और करुणा का प्रतीक है। इसी दिन को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है।
एक अन्य कथा के अनुसार इस दिन भगवान शिव का विवाह माता पार्वती से हुआ था। इसलिए कई स्थानों पर शिव-बारात निकाली जाती है और विवाह की झांकी सजाई जाती है।
व्रत और पूजा-विधि
महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। दिनभर फलाहार या निर्जल व्रत रखा जाता है और रात्रि में चार प्रहर की पूजा की जाती है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और अक्षत अर्पित किए जाते हैं।
“ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई आराधना से शिव प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
देशभर में उत्सव की धूम
उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक महाशिवरात्रि का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। वाराणसी, उज्जैन, सोमनाथ, केदारनाथ और रामेश्वरम जैसे प्रमुख शिवधामों में विशेष पूजा-अर्चना होती है। मंदिरों को फूलों और दीपों से सजाया जाता है, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण का आयोजन किया जाता है।
कई स्थानों पर भक्त कांवड़ यात्रा कर गंगाजल लाते हैं और शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। युवाओं और बच्चों में भी इस पर्व को लेकर खास उत्साह देखा जाता है।
आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
महाशिवरात्रि केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का भी अवसर है। योग परंपरा में यह माना जाता है कि इस रात्रि ब्रह्मांडीय ऊर्जा विशेष रूप से सक्रिय रहती है। ध्यान और साधना करने से मानसिक शांति और आत्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी रात्रि जागरण और ध्यान मन की एकाग्रता बढ़ाते हैं। उपवास शरीर को डिटॉक्स करता है और मानसिक संयम सिखाता है।
शिव का संदेश: सरलता और समर्पण
भगवान शिव का जीवन सादगी का प्रतीक है। वे कैलाश पर्वत पर वास करते हैं, भस्म धारण करते हैं और साधारण वेश में रहते हैं। यह संदेश देता है कि भौतिक वैभव से अधिक महत्वपूर्ण आंतरिक शांति और संतुलन है।
महाशिवरात्रि हमें यह भी सिखाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ क्यों न हों, धैर्य और विश्वास से उनका सामना किया जा सकता है। शिव की तरह विष को कंठ में रोककर अमृत समान व्यवहार करना ही सच्चा शिवत्व है।
युवाओं के लिए प्रेरणा
आज के दौर में जब तनाव, प्रतिस्पर्धा और भागदौड़ जीवन का हिस्सा बन चुके हैं, महाशिवरात्रि का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। यह पर्व आत्ममंथन का अवसर देता है। युवा वर्ग के लिए यह दिन संकल्प लेने का है—नशे से दूर रहने, सकारात्मक सोच अपनाने और जीवन में अनुशासन लाने का।
समाज में समरसता का पर्व
महाशिवरात्रि जाति, वर्ग और भेदभाव से ऊपर उठकर सभी को एक सूत्र में बांधती है। शिव ‘आदियोगी’ हैं और ‘भोलेनाथ’ भी—वे हर भक्त की पुकार सुनते हैं। इस दिन मंदिरों में हर वर्ग के लोग एक साथ पूजा करते दिखाई देते हैं, जो सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
15 फरवरी की यह पावन रात्रि हमें शिवत्व के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। यह केवल उपवास और पूजा का दिन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मबोध का अवसर है। महाशिवरात्रि हमें सिखाती है कि जीवन में संतुलन, संयम और समर्पण ही सच्ची सफलता का मार्ग है।
भगवान शिव की आराधना से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। इस महाशिवरात्रि पर हम सब संकल्प लें कि अपने भीतर के अंधकार को मिटाकर शिव की तरह प्रकाश फैलाएँ।
हर-हर महादेव!