यस बैंक–सुरक्षा एआरसी सौदे पर ईओडब्ल्यू की नजर, वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से हलचल

मुंबई। देश के बैंकिंग क्षेत्र में एक बार फिर हलचल मचने की संभावना है। यस बैंक और सुरक्षा एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के बीच हुए कर्ज सौदे को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। एचडीआईएल के निलंबित निदेशक राकेश कुमार वधावन की शिकायत के बाद मामला जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है और आर्थिक अपराध शाखा द्वारा प्रारंभिक स्तर पर इसकी समीक्षा की जा रही है।

वधावन ने आर्थिक अपराध शाखा को भेजे अपने विस्तृत पत्र में आरोप लगाया है कि तनावग्रस्त कर्जों की मंजूरी, पुनर्गठन और बाद में उनकी बिक्री की प्रक्रिया में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। शिकायत में कहा गया है कि कर्जों को सुरक्षा एआरसी को बेचते समय पारदर्शिता के मानकों का पालन नहीं किया गया और मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं।

आरोपों के मुताबिक, न तो स्वतंत्र मूल्यांकन कराया गया और न ही खुली प्रतिस्पर्धी बोली की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके साथ ही एआरसी द्वारा जमा की गई मार्जिन राशि के स्रोत को लेकर भी संदेह जताया गया है। पत्र में दावा किया गया है कि कुछ दस्तावेजों में फंड के घुमावदार लेन-देन के संकेत दिखाई देते हैं, जो पूरे सौदे को संदिग्ध बनाते हैं।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ कर्ज खातों को नियमित दिखाने और बैंक की बैलेंस शीट को मजबूत दर्शाने के लिए कथित तौर पर आपराधिक स्तर पर वित्तीय हेरफेर की कोशिश की गई। साथ ही, सारफेसी कानून और एआरसी व्यवस्था के दुरुपयोग के आरोप भी लगाए गए हैं। वधावन का कहना है कि कुछ मामलों में दिवाला प्रक्रिया को प्रभावित करने के उद्देश्य से कृत्रिम वित्तीय देनदारी तैयार की गई।

उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कई दस्तावेजों का हवाला दिया है, जिनमें विशेष ऑडिट रिपोर्ट, आंतरिक कर्ज मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड, कर्ज बिक्री समझौते और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल की टिप्पणियां शामिल बताई गई हैं। इन दस्तावेजों के साथ शिकायत भारतीय रिजर्व बैंक को भी भेजी गई है और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

सूत्रों के अनुसार, यदि प्रारंभिक जांच में आरोपों में तथ्य पाए जाते हैं तो मामला औपचारिक रूप से दर्ज किया जा सकता है और विस्तृत जांच शुरू हो सकती है। हालांकि, इस पूरे प्रकरण पर अब तक यस बैंक और सुरक्षा एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मामला आगे बढ़ता है तो बैंकिंग क्षेत्र में तनावग्रस्त कर्जों की बिक्री और एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनियों की भूमिका को लेकर पारदर्शिता पर एक बार फिर व्यापक बहस छिड़ सकती है। यह प्रकरण न केवल संबंधित संस्थानों के लिए बल्कि पूरे वित्तीय तंत्र के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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