बरसाना की लठामार होली में रंगों की बरसात, देश विदेश से उमड़ा सैलाब

ब्रज मंडल में गूंजे राधे राधे के जयकारे, प्रशासन ने संभाली सुरक्षा की कमान

मथुरा। विश्व विख्यात लठामार होली के अवसर पर बरसाना एक बार फिर रंग, उमंग और भक्ति के अनोखे संगम का साक्षी बना। ब्रज मंडल की धरती पर पारंपरिक उल्लास अपने चरम पर नजर आया। बरसाना की रंगीली गलियां अबीर गुलाल से सराबोर रहीं और राधारानी के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा। देश विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस अद्वितीय उत्सव का आनंद लेते हुए होली की मस्ती में खुद को पूरी तरह डुबो दिया।

मंदिरों और गलियों में रसिया गायन की स्वर लहरियां गूंजती रहीं। श्रद्धालु समूह बनाकर नृत्य करते, एक दूसरे पर रंग उड़ाते और भक्ति भाव से सराबोर दिखाई दिए। पूरा कस्बा मानो राधारानी और श्रीकृष्ण के प्रेम रंग में रंगा हुआ प्रतीत हुआ।

मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लेने के लिए जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने क्षेत्र का पैदल भ्रमण किया। लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवन में स्थापित सीसीटीवी कंट्रोल रूम से भी पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी की गई। अधिकारियों को सतर्कता और समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

इस अवसर पर गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजा कांत मिश्र, मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, पुलिस उप महानिरीक्षक शैलेश कुमार पांडेय, मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन जी और परिषद के मुख्य कार्यपालक अधिकारी सूरज पटेल सहित अनेक अधिकारी उपस्थित रहे।

उत्सव का प्रमुख आकर्षण नंदगांव से आए हुरियारों का आगमन रहा। रंगीली गली में उनके स्वागत के लिए विशेष तैयारियां की गईं। गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा के बीच हुरियारों का अभिनंदन हुआ। राधे राधे के उद्घोष और होरी गायन से वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बना रहा। श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया।

हालांकि, भारी भीड़ के चलते प्रशासनिक व्यवस्थाओं के बीच श्रद्धालुओं को कुछ कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा। दूरस्थ पार्किंग स्थलों से पैदल आने वाले श्रद्धालु जगह जगह लगाए गए बैरियरों पर रोक टोक से जूझते नजर आए। दर्शन की उत्सुकता और सुरक्षा प्रबंधों के कारण कई स्थानों पर हल्की नोकझोंक की स्थिति भी बनी।

परंपरा के अनुसार नंदगांव के हुरियारे पहले प्रिया कुंड पहुंचे, जहां विभिन्न समाजों की चौपई ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। भांग ठंडाई और होरी गायन के बीच उनका सम्मान किया गया। इसके बाद वे उत्सव में शामिल होने के लिए आगे बढ़े।

बरसाना की गलियों से लेकर परिक्रमा मार्ग तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही। ढोल की थाप, रसिया के सुर और उड़ते गुलाल के बीच पूरा वातावरण होलीमय बना रहा। ब्रज की इस ऐतिहासिक लठामार होली ने एक बार फिर आस्था, परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।

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