मुंबई। मुंबई पुलिस की अपराध शाखा (डीसीबी, सीआईडी) ने साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने विभिन्न कंपनियों के नाम पर नौ फर्जी फर्म पंजीकृत कर 55 बैंक खाते खुलवाए और इनके जरिये करोड़ों रुपये की संदिग्ध लेनदेन को अंजाम दिया।
प्रकरण क्रमांक 29/2026 के तहत दर्ज मामले में अपराध शाखा को सूचना मिली थी कि साइबर अपराध से अर्जित रकम को खपाने के लिए फर्जी कंपनियों का सहारा लिया जा रहा है। इन कंपनियों के नाम पर अलग-अलग बैंकों में खाते खोलकर अवैध धन का प्रवाह किया जा रहा था। सूचना के आधार पर 25 फरवरी 2026 को मस्जिद बंदर स्थित मांडवी इलाके में एक कार्यालय पर छापेमारी की गई।
छानबीन में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने आधार कार्ड और पैन कार्ड का उपयोग कर ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से नौ कंपनियां रजिस्टर कराईं। बाद में इन फर्मों के नाम पर विभिन्न बैंकों में कुल 55 खाते खुलवाए गए। इन खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धन को जमा करने और उसे अन्य खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस ने शाकिब नवाज शेर अली खान और जमील अहमद मोहम्मद जावेद अंसारी को गिरफ्तार किया है। दोनों से विस्तृत पूछताछ जारी है और मामले में अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 10 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप, 2 पेन ड्राइव, विभिन्न बैंकों की चेकबुक और 1,03,880 रुपये नकद बरामद किए। जब्त की गई सामग्री और नकदी का कुल मूल्य 2,35,880 रुपये आंका गया है।
प्रारंभिक जांच में संबंधित बैंक खातों के लेनदेन का ब्योरा जुटाया जा रहा है। जांच एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि इन खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये का अवैध ट्रांजेक्शन किया गया है। पुलिस का कहना है कि वित्तीय लेनदेन की परतें खुलने के साथ ही मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।
यह कार्रवाई सह पुलिस आयुक्त (अपराध) लखमी गौतम, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शैलेश बालकवडे, पुलिस उपायुक्त राज तिलक रौशन तथा सहायक पुलिस आयुक्त सदानंद राणे के मार्गदर्शन में क्राइम यूनिट 3 के प्रभारी पुलिस निरीक्षक सदानंद येरेकर और उनकी टीम ने अंजाम दी।