नवी मुंबई। नवी मुंबई के खारघर स्थित ओवे मैदान में आज ‘हिंद-दी-चादर’ के नाम से विख्यात गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी समागम का प्रथम दिन श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी। गुरुबाणी और कीर्तन की स्वर लहरियों से पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण में सराबोर हो गया।
सन् 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक में धर्म की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए बलिदान देने वाले गुरु तेग बहादुर की स्मृति में यह समागम आयोजित किया गया है। उनके बलिदान स्थल पर निर्मित गुरुद्वारा शीश गंज साहिब सिख समाज का प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है। इसी ऐतिहासिक घटना के 350 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में नवी मुंबई में राष्ट्रीय स्तर का यह आयोजन किया गया है। दो दिवसीय यह समागम शनिवार और रविवार को आयोजित हो रहा है। प्रशासन के अनुसार, इस अवसर पर लगभग 20 लाख श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
पहले दिन सुबह से ही खारघर रेलवे स्टेशन पर पंजाबी समाज सहित अन्य श्रद्धालुओं की उल्लेखनीय भीड़ देखी गई। मुंबई, ठाणे, पुणे और अन्य शहरों से बड़ी संख्या में लोग रेल मार्ग से यहां पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने खारघर रेलवे स्टेशन से ओवे मैदान तक निःशुल्क बस सेवा शुरू की है।
बढ़ती भीड़ को देखते हुए नवी मुंबई, पनवेल और ठाणे महानगरपालिकाओं के सहयोग से विशेष परिवहन व्यवस्था की गई है। बेस्ट, टीएमटी, केडीएमटी और एनएमएमटी परिवहन उपक्रमों के माध्यम से कुल 310 बसें उपलब्ध कराई गई हैं, जो विभिन्न प्रमुख स्थानों से खारघर की ओर संचालित हो रही हैं। स्टेशन के बाहर विशेष मार्गदर्शक संकेतक लगाए गए हैं और स्वयंसेवक श्रद्धालुओं को बस स्टॉप तक मार्गदर्शन दे रहे हैं। नियमित बस फेरियों के कारण आवागमन सुचारु बना हुआ है।
कार्यक्रम स्थल पर गुरु ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ जारी है। कीर्तन दरबार में रागी जत्थों द्वारा गुरुबाणी का भावपूर्ण गायन किया जा रहा है। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे श्रद्धालुओं से पूरा परिसर धार्मिक आस्था के रंग में रंगा नजर आ रहा है। लंगर व्यवस्था में सैकड़ों स्वयंसेवक सेवा में जुटे हैं और सभी धर्मों के लोगों के लिए सामूहिक लंगर की व्यवस्था की गई है।
सुरक्षा और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी व्यापक प्रबंध किए गए हैं। पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, चिकित्सकीय दल और एंबुलेंस सेवा पूरी तरह सतर्क हैं। भीड़ प्रबंधन को सुचारु रखने के लिए प्रशासन और स्वयंसेवक समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं।
350वें शहीदी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस समागम को पहले ही दिन व्यापक प्रतिसाद मिला है। आयोजकों का अनुमान है कि दूसरे और अंतिम दिन श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ेगी। श्रद्धा, इतिहास और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला यह शहीदी समागम नवी मुंबई में पूरे उत्साह के साथ प्रारंभ हो चुका है।