मुंबई। कोरोना महामारी और लॉकडाउन के बाद Municipal Corporation of Greater Mumbai के स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि एक नई रिपोर्ट ने शिक्षा व्यवस्था की एक गंभीर चुनौती भी उजागर की है—स्कूलों में दाखिला लेने वाले छात्रों में से बड़ी संख्या दसवीं कक्षा तक नहीं पहुंच पाती। वर्ष 2015-16 में पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले 100 छात्रों में से केवल 48 छात्र ही दसवीं तक पढ़ाई जारी रख सके।
यह जानकारी Praja Foundation द्वारा जारी “मुंबई महानगरपालिका स्कूलों की शैक्षणिक स्थिति 2026” रिपोर्ट में सामने आई है। इस रिपोर्ट में पिछले दस वर्षों के छात्र नामांकन, ड्रॉपआउट दर, स्वास्थ्य जांच, कर्मचारियों की उपलब्धता और शिक्षा बजट जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं का विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार महामारी के बाद मनपा स्कूलों में छात्रों की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि हुई है। कोरोना से पहले इन स्कूलों में लगभग 2 लाख 98 हजार विद्यार्थी पढ़ते थे। यह संख्या 2021-22 में बढ़कर 3 लाख 18 हजार तक पहुंच गई। हालांकि 2024-25 में यह थोड़ा घटकर करीब 3 लाख 10 हजार रह गई, लेकिन फिर भी यह संख्या महामारी से पहले की तुलना में अधिक मानी जा रही है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि पिछले एक दशक में मराठी और हिंदी माध्यम के स्कूलों में दाखिले में लगातार गिरावट आई है। मराठी माध्यम के स्कूलों में छात्र संख्या लगभग 34 प्रतिशत और हिंदी माध्यम में करीब 39 प्रतिशत घट गई है। इसके विपरीत अंग्रेजी माध्यम के मनपा स्कूलों में दाखिले में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में प्रवेश 54 प्रतिशत तक बढ़ा है। रिपोर्ट जारी करने के अवसर पर प्रजा फाउंडेशन के प्रतिनिधियों के साथ Sitaram Kunte और Avinash Dhakne भी उपस्थित थे।
प्रजा फाउंडेशन के प्रतिनिधि आसिफ खान ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए मनपा ने शिक्षा विभाग का रिकॉर्ड 4,105 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। इस बजट के अनुसार प्रति छात्र औसतन लगभग 11.32 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी राशि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है। उन्होंने सुझाव दिया कि मनपा के शिक्षा विभाग को अब “परिणाम-आधारित बजट” प्रणाली अपनानी चाहिए। इससे शिक्षा व्यवस्था में मौजूद कमियों की पहचान कर उनके समाधान के लिए लक्षित योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
गौरतलब है कि प्रजा फाउंडेशन हर वर्ष महानगरपालिका के कामकाज पर विभिन्न रिपोर्ट जारी करता है, जिनमें नागरिक सेवाओं, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्थाओं का मूल्यांकन किया जाता है। पहले इन रिपोर्टों में की गई आलोचनाओं के कारण मनपा प्रशासन और संस्था के बीच दूरी भी देखी गई थी। हालांकि इस बार रिपोर्ट जारी करने के दौरान मनपा शिक्षा विभाग के अधिकारी भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहे, जिससे यह संकेत मिल रहा है कि प्रशासन अब इन सुझावों को सकारात्मक रूप से देखने लगा है।