मुंबई: मुंबई विश्वविद्यालय ने हरित ऊर्जा की दिशा में अहम पहल करते हुए अपने कलिना परिसर में 200 किलोवाट क्षमता का सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है। इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, परिसर की 6 प्रमुख इमारतों पर कुल 187 किलोवाट क्षमता की सौर ऊर्जा प्रणाली स्थापित की गई है। इसके साथ ही पूरे परिसर में 20 वॉट क्षमता के 85 सौर स्ट्रीट लाइट्स भी लगाए गए हैं, जिससे परिसर में स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग और अधिक बढ़ेगा।
इस परियोजना के शुरू होने से अब कलिना परिसर का बड़ा हिस्सा अक्षय ऊर्जा पर आधारित होगा। इससे न केवल बिजली पर होने वाला खर्च कम होगा, बल्कि पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। अनुमान है कि सौर ऊर्जा के उपयोग से हर महीने 4 लाख रुपये से अधिक की बिजली बचत होगी, जो सालाना बड़ी आर्थिक राहत साबित होगी।
इस सोलर प्रोजेक्ट में आधुनिक नेट मीटरिंग प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। इसके जरिए उत्पन्न सौर ऊर्जा का सीधे उपयोग किया जा सकेगा और अतिरिक्त बिजली को भी ग्रिड में भेजकर उसका समुचित प्रबंधन किया जाएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह प्रणाली हर साल करीब 2 लाख 60 हजार यूनिट बिजली उत्पादन करने में सक्षम होगी।
बढ़ती बिजली की मांग और ऊंची दरों के बीच यह कदम ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, यह परियोजना जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और “कार्बन न्यूट्रल ग्रीन कैंपस” के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में ठोस प्रयास है।
इससे पहले विश्वविद्यालय ने ठाणे परिसर में 120 किलोवाट क्षमता का सौर प्रोजेक्ट सफलतापूर्वक शुरू किया था। अब कलिना परिसर में इसका विस्तार कर विश्वविद्यालय ने हरित ऊर्जा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवींद्र कुलकर्णी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल ऊर्जा बचत नहीं, बल्कि छात्रों और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। उन्होंने कहा कि अक्षय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने, कार्बन उत्सर्जन घटाने और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय लगातार नई योजनाएं लागू कर रहा है।
कलिना परिसर की जिन इमारतों में यह सौर प्रणाली लगाई गई है, उनमें सी. डी. देशमुख भवन, फिरोजशाह मेहता भवन, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद भवन, बायोफिजिक्स विभाग, पुराना व्याख्यान संकुल और लाइफ साइंस विभाग की इमारतें शामिल हैं। इसके अलावा, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर प्रशासनिक भवन में 20 किलोवाट क्षमता का सोलर प्रोजेक्ट अंतिम चरण में है, जिसे जल्द ही चालू किया जाएगा।
इस पहल के साथ मुंबई विश्वविद्यालय देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में हरित ऊर्जा अपनाने की दिशा में अग्रणी बनता नजर आ रहा है।