‘माय मुंबई’ प्रदर्शनी: बेघर नागरिकों की नजर से उभरा शहर का अनदेखा चेहरा


मुंबई। सपनों की नगरी कही जाने वाली मुंबई की रफ्तार जितनी तेज है, उतनी ही तेजी से यहां कई मानवीय कहानियां भी भीड़ में गुम हो जाती हैं। इन्हीं अनदेखे पहलुओं को उजागर करने का सराहनीय प्रयास ‘माय मुंबई’ छायाचित्र प्रदर्शनी ने किया, जिसमें बेघर नागरिकों द्वारा खींची गई तस्वीरों ने शहर को एक नई और संवेदनशील दृष्टि से सामने रखा।
मुंबई प्रेस क्लब में आयोजित इस अनूठी प्रदर्शनी में 35 बेघर प्रतिभागियों ने अपनी नजरों से मुंबई को कैमरे में कैद किया। उल्लेखनीय है कि इनमें से अधिकांश ने पहले कभी कैमरा नहीं चलाया था, फिर भी उनकी तस्वीरों में शहर की सच्चाई, भावनाएं और संघर्ष बेहद प्रभावशाली ढंग से उभरकर सामने आए। प्रतिभागियों को Fujifilm Quicksnap डिस्पोजेबल कैमरे उपलब्ध कराए गए थे, जिनकी मदद से उन्होंने कुल 945 तस्वीरें खींचीं। इन छायाचित्रों में सड़कों की हलचल, अकेलेपन के पल, आशा की किरण और जीवन के संघर्ष का सजीव चित्रण देखने को मिला।
इस विशेष पहल का आयोजन मुंबई स्थित पहचान संस्था द्वारा किया गया, जिसका उद्देश्य बेघर नागरिकों को अभिव्यक्ति का मंच प्रदान करना और समाज के सामने उनकी दृष्टि को लाना था। प्रदर्शनी ने यह स्पष्ट किया कि कला केवल तकनीक की नहीं, बल्कि अनुभव और संवेदनशीलता की भी अभिव्यक्ति होती है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं राज्य स्तरीय आश्रय निगरानी समिति के अध्यक्ष उज्ज्वल उके ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रयास समाज के हाशिये पर खड़े लोगों को अपनी बात रखने का सशक्त माध्यम देता है। उन्होंने अपने छात्र जीवन के फोटोग्राफी अनुभव साझा करते हुए बताया कि तस्वीरें केवल दृश्य नहीं, बल्कि भावनाओं और कहानियों को भी संजोती हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली और भाजपा प्रवक्ता संजय ठाकूर भी मौजूद रहे। दोनों ने पहचान संस्था के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि बेघर नागरिकों के लिए आश्रय के साथ-साथ उन्हें अपनी अभिव्यक्ति का मंच देना आज के समय की बड़ी जरूरत है।
संस्था के संस्थापक-संचालक बृजेश आर्य ने इस प्रोजेक्ट की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि पिछले दो वर्षों में इस तरह की कई सफल प्रदर्शनी आयोजित की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल बेघर लोगों को आत्मविश्वास देती है, बल्कि समाज को भी उनके जीवन को करीब से समझने का अवसर प्रदान करती है।
कार्यक्रम में पूर्व कुलगुरु प्रो. भालचंद्र मुणगेकर, पूर्व उपमहापौर अरुण देव सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। वहीं पहचान फाउंडेशन की टीम—सुभाष, रेचेल, समीर और सार्थक—के प्रयासों की भी व्यापक सराहना की गई।
‘माय मुंबई’ प्रदर्शनी ने यह साबित कर दिया कि कला किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती। संवेदनशील नजर और जीवन के अनुभव ही उसे असाधारण बना देते हैं। यह पहल न केवल एक प्रदर्शनी, बल्कि उन अनसुनी आवाजों का मंच बनकर उभरी, जिन्हें अक्सर समाज नजरअंदाज कर देता है।

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