महाराष्ट्र, मुंबई : महिला एवं बाल विकास मंत्री आदिती तटकरे ने बताया कि अक्षय तृतीया के अवसर पर राज्यभर में चलाए गए विशेष अभियान के तहत एक ही दिन में 32 बाल विवाह रोके गए। विभाग की विशेष टीमों ने विभिन्न जिलों में समय रहते हस्तक्षेप किया और संभावित बाल विवाहों को होने से पहले ही रोक दिया। इस कार्रवाई को बाल विवाह के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है और इसे राज्य की सक्रिय कार्यप्रणाली का उदाहरण बताया गया है।
मंत्री आदिती तटकरे ने कहा कि बाल विवाह निषेध कानून 2006 के अनुसार 18 वर्ष से कम आयु की लड़की और 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह कराना दंडनीय अपराध है। राज्य सरकार “बाल विवाह मुक्त भारत” अभियान के तहत सख्त निगरानी और जागरूकता कार्यक्रम चला रही है। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया के दौरान कुछ स्थानों पर परंपरा के नाम पर कम उम्र में विवाह कराने की कोशिशें होती हैं, जिन्हें रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहता है और पहले से योजना बनाकर कार्रवाई की जाती है।
अभियान के दौरान रायगढ़ में 2, पालघर में 1, सांगली में 1, नासिक में 2 और अहिल्यानगर में 5 बाल विवाह रोके गए। इसके अलावा परभणी में 1, लातूर में 1, बीड में 3, हिंगोली में 1, धाराशिव में 2, संभाजीनगर में 4 और बुलढाणा में 1 मामला रोका गया। अमरावती क्षेत्र के अकोला में 4 तथा नागपुर क्षेत्र के यवतमाल में 2 और चंद्रपुर में 2 बाल विवाह रोके गए। इस प्रकार कुल 32 मामलों में प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई की।
मंत्री आदिती तटकरे ने कहा कि बाल विवाह केवल कानून का उल्लंघन नहीं है, बल्कि बच्चों के अधिकारों का हनन भी है। इसलिए विभाग द्वारा बाल विवाह रोकने के साथ-साथ संबंधित बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। परिवारों से लगातार संपर्क कर उन्हें जागरूक किया जा रहा है और आवश्यक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने बताया कि बाल विवाह कराने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है और आगे भी सख्ती जारी रहेगी। विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से राज्य स्तर पर कार्यशाला का आयोजन भी किया गया, जिसमें जिलों के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हुए। इस दौरान बाल विवाह रोकने के उपायों और बेहतर समन्वय पर विस्तार से चर्चा की गई।