‘राजा शिवाजी’ का बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक पराक्रम, रितेश देशमुख की फिल्म ने दूसरे वीकेंड में मचाया धमाल, 75 करोड़ के पार पहुंची कमाई

सामना संवाददाता / मुंबई

मराठी सिनेमा के इतिहास में नई इबारत लिखती फिल्म ‘राजा शिवाजी’ बॉक्स ऑफिस पर लगातार विजय पताका फहरा रही है। जियो स्टूडियोज और मुंबई फिल्म कंपनी के बैनर तले बनी इस ऐतिहासिक महाकाव्य फिल्म ने दूसरे वीकेंड में जबरदस्त उछाल दर्ज करते हुए 75.10 करोड़ रुपये का भारत नेट संग्रह हासिल कर लिया है। अभिनेता रितेश देशमुख द्वारा निर्देशित यह फिल्म दर्शकों के बीच देशभक्ति, शौर्य और इतिहास के गौरव का नया उत्साह जगा रही है।

पहले सप्ताह में रिकॉर्डतोड़ शुरुआत करने वाली ‘राजा शिवाजी’ ने दूसरे सप्ताह में भी अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। शनिवार और रविवार को सिनेमाघरों में परिवार दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे फिल्म की कमाई में उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। फिल्म व्यापार विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रदर्शन मराठी सिनेमा के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।

फिल्म के अब तक के भारत नेट संग्रह पर नजर डालें तो पहले सप्ताह में इसने 57.70 करोड़ रुपये का कारोबार किया। इसके बाद आठवें दिन यानी शुक्रवार को 3.50 करोड़ रुपये, नौवें दिन शनिवार को 6.30 करोड़ रुपये और दसवें दिन रविवार को 7.60 करोड़ रुपये की कमाई दर्ज की गई। इस तरह फिल्म का कुल नेट संग्रह 75.10 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

‘राजा शिवाजी’ ने मराठी फिल्म उद्योग के कई पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। फिल्म ने सबसे बड़ी ओपनिंग डे कमाई, सबसे बड़ा ओपनिंग वीकेंड, एक दिन में सर्वाधिक संग्रह और पहले सप्ताह में सबसे अधिक कमाई करने वाली मराठी फिल्म का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। महाराष्ट्र के साथ-साथ देशभर में फिल्म को जबरदस्त प्रतिसाद मिल रहा है।

यह महत्वाकांक्षी परियोजना छत्रपति शिवाजी महाराज के गौरवशाली जीवन, संघर्ष, रणनीति और स्वाभिमान पर आधारित है। फिल्म में इतिहास को भव्यता और भावनात्मक गहराई के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिसने युवा पीढ़ी को भी मराठा इतिहास से जोड़ने का काम किया है।

फिल्म की सफलता पर जियो स्टूडियोज की ज्योति देशपांडे, अभिनेत्री गेनेलिया देशमुख और पूरी टीम ने खुशी व्यक्त की है। फिल्म समीक्षकों का मानना है कि ‘राजा शिवाजी’ ने यह साबित कर दिया है कि क्षेत्रीय सिनेमा भी राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान और व्यावसायिक सफलता हासिल कर सकता है।

मराठी सिनेमा के लिए यह केवल एक फिल्म की सफलता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक विरासत के पुनर्जागरण का प्रतीक बनती जा रही है।

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