नवी मुंबई : वाशी स्थित मुंबई कृषि उपज बाजार समिति (एपीएमसी) परिसर में आयोजित दो दिवसीय निःशुल्क मुख कैंसर पूर्व जांच शिविर से चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। 26 और 27 मई को आयोजित इस शिविर में जांच किए गए 389 लोगों में से 75 लोगों में मुंह के कैंसर के लक्षण पाए गए। इनमें से 21 लोगों की स्थिति गंभीर होने के कारण उन्हें तत्काल बायोप्सी जांच के लिए भेजा गया है। इस आंकड़े ने एपीएमसी परिसर में तंबाकू और गुटखा सेवन की भयावह स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर यह शिविर विपणन मंत्री जयकुमार रावल के मार्गदर्शन और एपीएमसी सचिव शरद जरे की पहल पर आयोजित किया गया। टाटा मेमोरियल सेंटर और वर्ल्ड एग्रो केयर फाउंडेशन के संयुक्त सहयोग से एपीएमसी के मसाला और फल बाजार में यह अभियान चलाया गया। इसका उद्देश्य तंबाकूजनित गंभीर बीमारियों का समय रहते पता लगाना और लोगों में जागरूकता फैलाना था।
शिविर की रिपोर्ट से साफ हुआ कि एपीएमसी परिसर में काम करने वाले माथाडी मजदूरों, हमालों, सफाई कर्मचारियों और व्यापारियों में तंबाकू सेवन तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि बाजार परिसर में भारी भीड़ होने के बावजूद जांच शिविर को अपेक्षित प्रतिसाद नहीं मिला। चिकित्सा दल ने चिंता जताई कि जहां पान की दुकानों पर गुटखा और तंबाकू खरीदने वालों की लंबी कतारें दिखाई देती हैं, वहीं स्वास्थ्य जांच के प्रति लोगों में गंभीरता की कमी नजर आई।
एपीएमसी के पांच प्रमुख बाजार विभागों में सौ से अधिक पान दुकानों के संचालन की जानकारी सामने आई है। बाजार से जुड़े लोगों का आरोप है कि इनमें बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पाद खुलेआम बेचे जा रहे हैं। खाद्य एवं औषधि प्रशासन समय-समय पर कार्रवाई कर कुछ दुकानों को सील करता है, लेकिन कुछ ही महीनों में वे फिर शुरू हो जाती हैं। इससे प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में मुख कैंसर के मामलों में और वृद्धि हो सकती है। विशेषज्ञों ने कहा कि केवल जनजागरण नहीं, बल्कि कठोर और निरंतर कार्रवाई की भी आवश्यकता है। गंभीर लक्षण पाए गए लोगों को आगे के उपचार और परामर्श के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। साथ ही बाजार परिसर के सभी कामगारों और व्यापारियों से नियमित कैंसर जांच करवाने की अपील की गई है।