नायर अस्पताल में मरीज बेहाल, परिजनों पर बढ़ा बोझ

व्हीलचेयर से लेकर एमआरआई तक संकट, गंदगी और आवारा कुत्तों ने बढ़ाई चिंता

मुंबई। महानगरपालिका के बी.वाई.एल. नायर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ रहा है। शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शुमार इस अस्पताल में कर्मचारियों की कमी, गंदगी, बंद पड़ी एमआरआई सेवा और निर्माण कार्य से उपजी अव्यवस्था ने मरीजों की परेशानियां कई गुना बढ़ा दी हैं।

अस्पताल में मरीजों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त वॉर्डबॉय और सहायक कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं। नतीजतन, व्हीलचेयर और स्ट्रेचर पर मरीजों को ढोने की जिम्मेदारी उनके परिजनों के कंधों पर आ गई है। कई बार मरीज के रिश्तेदार और एकमात्र उपलब्ध वॉर्डबॉय मिलकर स्ट्रेचर संभालते दिखाई देते हैं। इससे पहले से मानसिक दबाव झेल रहे परिवारों की मुश्किलें और बढ़ रही हैं।

दूसरी ओर, अस्पताल परिसर में जारी नई इमारत के निर्माण कार्य ने भी हालात को और जटिल बना दिया है। धूल, गंदगी और दुर्गंध के कारण मरीजों और उनके परिजनों में नाराजगी बढ़ रही है। विशेष रूप से अस्थि रोग विभाग के आसपास बदबू और अस्वच्छता की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। मच्छरों के बढ़ते प्रकोप ने संक्रामक बीमारियों के खतरे को लेकर भी चिंता पैदा कर दी है।

अस्पताल के कुछ कॉरिडोर में आवारा कुत्तों के घूमने की शिकायतें भी सामने आई हैं। इससे बुजुर्ग मरीजों, बच्चों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं निर्माणाधीन क्षेत्रों के आसपास बैठने को मजबूर लोगों के लिए दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है।

इस बीच, अस्पताल की एमआरआई सेवा अब तक बहाल नहीं हो सकी है। इसके कारण मरीजों को जांच के लिए धारावी स्थित केंद्र का रुख करना पड़ रहा है। इससे आर्थिक और शारीरिक रूप से कमजोर मरीजों की परेशानियां और बढ़ गई हैं।

हालांकि अस्पताल में नए कैज्युअल्टी विभाग समेत कई सुविधाओं के निर्माण का कार्य जारी है और भविष्य में सेवाओं के विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन तब तक मरीजों और उनके परिजनों की रोजमर्रा की मुश्किलों का समाधान कैसे होगा, यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। शहर के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र में उत्पन्न यह स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों को भी उजागर कर रही है।

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