मुंबई। समाजवादी पार्टी के मुंबई-महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अबू आसिम आजमी ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाकर एक नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गए पत्र में उन्होंने न केवल देशी गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने की वकालत की है, बल्कि गाय के नाम पर हिंसा करने वाले स्वयंभू गौरक्षकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।
अबू आजमी ने अपने पत्र में कहा कि गाय भारतीय समाज और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। हिंदू समुदाय में गाय को पूजनीय माना जाता है, वहीं दूध और उससे बनने वाले उत्पादों का देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण जीवन में विशेष महत्व है। ऐसे में करोड़ों लोगों की आस्था और भावनाओं का सम्मान करते हुए देशी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गाय की सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की है, न कि कानून को अपने हाथ में लेने वाले तत्वों की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में गाय वध या तस्करी के संदेह के आधार पर भीड़ हिंसा और हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिसने सामाजिक सौहार्द और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
समाजवादी पार्टी नेता ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि ऐसे मामलों में शामिल तथाकथित गौरक्षकों के खिलाफ सख्त और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता और संदेह के आधार पर हिंसा या हमला करना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं है।
अबू आजमी ने जोर देकर कहा कि गाय के संरक्षण और कानून के शासन, दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है। उनका कहना था कि यदि गाय की रक्षा के नाम पर निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जाता है, तो इससे समाज में भय और अविश्वास का वातावरण पैदा होता है, जो देश की एकता और भाईचारे के लिए नुकसानदायक है।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि गायों की सुरक्षा के लिए मजबूत और प्रभावी कानून बनाए जाएं तथा भीड़ हिंसा और कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कठोर कार्रवाई की जाए। आजमी ने कहा कि देश में शांति, सामाजिक सद्भाव और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए यह आवश्यक है कि कानून का राज हर हाल में कायम रहे।
अबू आजमी के इस पत्र ने एक बार फिर गाय संरक्षण, भीड़ हिंसा और कानून व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।