मुंबई। पानी के टैंकरों की हड़ताल खत्म होने के बाद राहत की उम्मीद कर रहे मुंबईकरों को अब एक नई मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। शहर में पानी के टैंकरों की कथित कालाबाजारी और मनमाने दाम वसूले जाने के आरोपों ने हड़कंप मचा दिया है। कई इलाकों से शिकायतें सामने आई हैं कि कुछ निजी टैंकर संचालक पानी के संकट को कमाई के बड़े अवसर में बदल रहे हैं और नागरिकों की मजबूरी का फायदा उठाकर भारी रकम वसूल रहे हैं।
सबसे चौंकाने वाला मामला दक्षिण मुंबई के प्रभादेवी इलाके से सामने आया, जहां एक आवासीय सोसायटी में अचानक पानी की कमी होने पर निजी टैंकर मंगाने की कोशिश की गई। सोसायटी पदाधिकारियों के अनुसार, जिस टैंकर की सामान्य कीमत 6 से 8 हजार रुपये होती है, उसके लिए 25 हजार रुपये की मांग की गई। छोटे टैंकर, जो पहले तीन हजार रुपये में उपलब्ध हो जाते थे, उनके दाम भी कई गुना बढ़ा दिए गए।
हाल ही में टैंकर संचालकों और प्रशासन के बीच विवाद के कारण शहर में पानी की आपूर्ति प्रभावित हुई थी। राज्य सरकार के हस्तक्षेप के बाद हड़ताल तो समाप्त हो गई, लेकिन अब आरोप लग रहे हैं कि कुछ टैंकर ऑपरेटरों ने आपूर्ति व्यवस्था पर पकड़ मजबूत कर कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। इससे हजारों सोसायटियां और व्यावसायिक प्रतिष्ठान मुश्किल में पड़ गए हैं।
मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में आवासीय परिसरों, निर्माण परियोजनाओं और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की पानी की अतिरिक्त जरूरतें निजी टैंकरों के माध्यम से पूरी होती हैं। ऐसे में टैंकरों की दरों में अचानक आई उछाल ने नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि भीषण गर्मी और जल संकट के बीच पानी जैसी मूलभूत आवश्यकता को लेकर खुलेआम मुनाफाखोरी हो रही है।
इस घटनाक्रम के बाद सरकार और प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि हड़ताल समाप्त कराने के बाद भी टैंकरों की दरों को नियंत्रित करने और कथित कालाबाजारी रोकने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं बनाई गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो लाखों मुंबईकरों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
नागरिकों ने सरकार और बृहन्मुंबई महानगरपालिका से मांग की है कि टैंकरों की अधिकतम दरें तय की जाएं, मनमानी वसूली करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए। पानी जैसी आवश्यक सेवा को निजी मुनाफाखोरी से बचाने के लिए विशेष नियंत्रण तंत्र स्थापित करने की भी मांग तेज हो गई है।
मानसून दस्तक दे चुका है, लेकिन शहर के कई हिस्सों में पानी का संकट अब भी बरकरार है। ऐसे में टैंकरों की कथित कालाबाजारी प्रशासन के लिए नई अग्निपरीक्षा बन गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार और महानगरपालिका इस बढ़ते विवाद पर कैसे अंकुश लगाती हैं और क्या मुंबईकरों को राहत मिल पाती है।