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सुजाता सूरज पाटिल बनीं मेयर, दशरथ भगत डिप्टी मेयर; गठबंधन के बावजूद शिवसेना को नहीं मिला कोई प्रमुख पद
नवी मुंबई : नवी मुंबई महानगरपालिका के महापौर और उपमहापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए दोनों प्रमुख पदों पर कब्जा जमा लिया है। गुरुवार को हुए चुनाव में बीजेपी की पार्षद सुजाता सूरज पाटिल महापौर चुनी गईं, जबकि पार्टी के ही दशरथ भगत उपमहापौर बने। इस परिणाम से एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है, क्योंकि गठबंधन में रहने के बावजूद उसे दोनों में से कोई भी पद नहीं मिल सका।
महापौर पद की दौड़ में सुजाता पाटिल ने शिवसेना की उम्मीदवार सरोज रोहिदास पाटिल को पराजित किया। वहीं, उपमहापौर पद के लिए हुए मुकाबले में बीजेपी के दशरथ भगत ने शिवसेना के आकाश बालकृष्ण माधवी को मात दी। 111 सदस्यीय नवी मुंबई महानगरपालिका में बीजेपी के पास 65 नगरसेवकों का स्पष्ट बहुमत है, जबकि शिवसेना (शिंदे गुट) के 42 पार्षद हैं। दोनों दलों ने चुनाव तो गठबंधन में लड़ा था, लेकिन पदों के बंटवारे में बीजेपी ने अपनी मजबूत स्थिति का फायदा उठाया।

सुजाता सूरज पाटिल बीजेपी की सक्रिय पार्षद हैं और यह उनका दूसरा कार्यकाल है। वे वरिष्ठ भाजपा नेता सूरज पाटिल की पत्नी हैं, जिन्हें शहर की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाला चेहरा माना जाता है। अपेक्षाकृत नई होने के बावजूद उन्हें महापौर पद के लिए चुना जाना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जाता है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता और मंत्री गणेश नाइक ने अनुभवी नेताओं की बजाय सुजाता पाटिल पर भरोसा जताया, जिसमें उनकी निष्ठा और संगठन से जुड़ाव को प्राथमिकता दी गई।
सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले से पार्टी के कई वरिष्ठ पार्षद भी हैरान रह गए। कई अनुभवी महिला नेताओं को इस पद का मजबूत दावेदार माना जा रहा था, लेकिन नामांकन के दिन सुबह ही सुजाता पाटिल के नाम पर अंतिम मुहर लगने की जानकारी अधिकांश पार्षदों को मिली।
इधर, शिवसेना और अन्य विपक्षी दलों ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मंत्री गणेश नाइक ने एकतरफा फैसला लेते हुए महायुति गठबंधन के सहयोगियों की अनदेखी की।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव 15 जनवरी को हुए थे और 16 जनवरी को परिणाम घोषित किए गए थे। नवी मुंबई में बीजेपी की मजबूत जीत के बाद महापौर और उपमहापौर दोनों पदों पर उसका कब्जा शहर की राजनीति में उसके बढ़ते प्रभाव का संकेत माना जा रहा है।