Home ताजा खबरमरोल में बनेगा ₹138 करोड़ का आधुनिक थोक मछली बाजार, PMMSY के तहत परियोजना को मिली प्रशासनिक मंजूरी

मरोल में बनेगा ₹138 करोड़ का आधुनिक थोक मछली बाजार, PMMSY के तहत परियोजना को मिली प्रशासनिक मंजूरी

by trilokvivechana
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मंत्री नितेश राणे के प्रयासों से मिली स्वीकृति; 2,816 मछुआरों को बंदी अवधि में आजीविका और पोषण सहायता का लाभ

मुंबई, 12 फरवरी 2026: केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत महाराष्ट्र के वर्ष 2025-26 की वार्षिक कार्ययोजना को स्वीकृति मिल गई है। इस योजना के अंतर्गत मुंबई के अंधेरी स्थित मरोळ क्षेत्र में 138 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक थोक मछली बाजार विकसित करने की परियोजना को प्रशासनिक मंजूरी प्रदान की गई है। इसके साथ ही मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि के दौरान राज्य के 2,816 पारंपरिक और आर्थिक रूप से कमजोर मछुआरों को आजीविका एवं पोषण सहायता देने का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

राज्य के मत्स्य व्यवसाय एवं बंदरगाह मंत्री नितेश राणे के लगातार प्रयासों के चलते इस परियोजना को मंजूरी मिल सकी। मत्स्य विभाग के अनुसार, मंत्री राणे ने राज्य के प्रस्ताव को शीघ्र स्वीकृति दिलाने और निधि वितरण में देरी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार के संबंधित मंत्रालयों, राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) और अन्य प्राधिकरणों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखा। उनके सक्रिय प्रयासों का ही परिणाम है कि यह महत्वपूर्ण परियोजना प्रशासनिक स्वीकृति के अंतिम चरण तक पहुंच सकी।

मंत्री नितेश राणे ने इस अवसर पर कहा कि मुंबई जैसे महानगर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के थोक मछली बाजार की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस परियोजना के पूरा होने से व्यापार व्यवस्था अधिक सुदृढ़ होगी और हजारों मछुआरों, व्यापारियों तथा इससे जुड़े अन्य लोगों को रोजगार और आर्थिक स्थिरता मिलेगी। उन्होंने इसे महाराष्ट्र में ‘ब्लू इकॉनॉमी’ को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया।

अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा बाजार

प्रस्तावित मछली बाजार मरोळ में छह मंजिला आधुनिक इमारत के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें व्यापार और भंडारण के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसमें कोल्ड चेन सिस्टम, स्वच्छता बनाए रखने के लिए उन्नत अपशिष्ट जल प्रबंधन व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा तंत्र, सौर ऊर्जा संयंत्र, आधुनिक विद्युत प्रणाली और पर्याप्त पार्किंग सुविधा शामिल होंगी।

इसके अलावा, यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यापार प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे मछलियों के भंडारण, वर्गीकरण, प्रसंस्करण और वितरण की प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और गुणवत्ता युक्त बन सकेगी। इससे निर्यात के लिए तैयार किए जाने वाले समुद्री उत्पादों की गुणवत्ता में भी सुधार होने की उम्मीद है। पारंपरिक मछुआरों, थोक विक्रेताओं और व्यापारियों को एक पारदर्शी और आधुनिक व्यापारिक मंच उपलब्ध होगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि की संभावना बढ़ेगी।

मछुआरों को मिलेगा सामाजिक और आर्थिक सहारा

इस योजना के तहत मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि में राज्य के 2,816 मछुआरा लाभार्थियों को आजीविका और पोषण सहायता प्रदान की जाएगी। यह सहायता विशेष रूप से उन परिवारों के लिए राहत साबित होगी, जिनकी आय पूरी तरह मछली पकड़ने पर निर्भर रहती है। इससे प्रतिबंध अवधि के दौरान उनकी आर्थिक स्थिति को संभालने में मदद मिलेगी।

मत्स्य क्षेत्र को मिलेगी नई दिशा

इस परियोजना के पूरा होने से मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद मौजूदा मछली बाजारों पर दबाव कम होगा और एक सुव्यवस्थित, स्वच्छ और तकनीकी रूप से सक्षम बाजार व्यवस्था विकसित हो सकेगी। बेहतर बुनियादी ढांचे के कारण निर्यातकों को भी आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, जिससे महाराष्ट्र के समुद्री उत्पादों के निर्यात में बढ़ोतरी की संभावना है।

राज्य सरकार ने इस परियोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए एक स्वतंत्र निगरानी और मॉनिटरिंग तंत्र स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। सभी प्रक्रियाएं केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित की जाएंगी।

यह स्वीकृति न केवल राज्य के मत्स्य क्षेत्र में संरचनात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, बल्कि इससे समुद्री अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने और हजारों परिवारों के जीवन स्तर में सुधार की भी उम्मीद जताई जा रही है।

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