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लातूर को स्टेट एनर्जी अवॉर्ड 2024-25, कलेक्टर वर्षा ठाकुर घुगे की पहल रंग लाई

by trilokvivechana
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सौर ऊर्जा और बिजली बचत अभियानों से बदली जिले की तस्वीर

मुंबई। वर्षा ठाकुर घुगे एक बार फिर अपनी कार्यशैली और प्रशासनिक पहल को लेकर चर्चा में हैं। राज्य सरकार ने ऊर्जा संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए लातूर जिले को स्टेट एनर्जी अवॉर्ड 2024-25 के लिए चयनित किया है। इस उपलब्धि ने जिले के साथ-साथ वहां की कलेक्टर वर्षा ठाकुर घुगे की प्रशासनिक दक्षता को भी नई पहचान दिलाई है।

इस पुरस्कार की घोषणा राज्य के ऊर्जा मंत्री और लातूर के पालक मंत्री शिवेंद्रसिंहराजे भोसले ने की। सरकार के अनुसार जिले ने बिजली बचत, सौर ऊर्जा के उपयोग और ऊर्जा संरक्षण से जुड़े अभियानों को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया है। सरकारी कार्यालयों में सोलर पैनलों की स्थापना बढ़ाई गई, साथ ही कर्मचारियों और नागरिकों के बीच ऊर्जा बचत को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाए गए।

जिले में स्कूलों के विद्यार्थियों को ऊर्जा संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए ‘ऊर्जादूत’ नामक विशेष पहल शुरू की गई, जिससे नई पीढ़ी को टिकाऊ जीवनशैली की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है। कलेक्टरेट परिसर में 100 किलोवॉट का सोलर पावर प्रोजेक्ट स्थापित किया गया और ऊर्जा दक्ष उपकरणों का उपयोग बढ़ाया गया। इसके परिणामस्वरूप हर वर्ष करीब 55,000 यूनिट बिजली की बचत संभव हो पाई है।

वर्षा ठाकुर घुगे वर्ष 2011 बैच की आईएएस अधिकारी हैं और जुलाई 2023 से लातूर जिले की कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। इससे पहले वे नांदेड जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रह चुकी हैं। उन्होंने औरंगाबाद (छत्रपति संभाजीनगर) में डिप्टी कमिश्नर (आपूर्ति) के पद पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।

अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई जनहितकारी योजनाओं को गति दी, जिनमें ‘मेरी बेटी–मेरा अभियान’ विशेष रूप से लोकप्रिय रहा। प्रशासनिक सेवाओं में उनके योगदान के लिए उन्हें मराठवाड़ा भूषण अवॉर्ड (2024), कोविड वॉरियर सम्मान और बेस्ट रेवेन्यू ऑफिसर जैसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं।

10 जून 1970 को जन्मीं वर्षा ठाकुर ने स्नातक के बाद एलएलबी की पढ़ाई की और मराठवाड़ा क्षेत्र से ही उनका गहरा जुड़ाव रहा है। उनके नेतृत्व में लातूर जिले ने ऊर्जा संरक्षण के क्षेत्र में जो उदाहरण प्रस्तुत किया है, उसे राज्य स्तर पर एक आदर्श मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।

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