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मुंबई प्यास से बेहाल!, सात झीलों में सिर्फ 45 दिन का स्टॉक बचा

by trilokvivechana
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15 दिन से पानी पर पहरा, अंधेरी से चेंबूर तक हाहाकार

टैंकर माफिया सक्रिय; बीएमसी की 10% कटौती से करोड़ों लोग परेशान

सामना संवाददाता / मुंबई

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई इन दिनों भीषण जलसंकट की गिरफ्त में है। आसमान से बरसती आग और जमीन पर सूखते जलस्रोतों ने मुंबईकरों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। महानगर के लाखों परिवार बूंद-बूंद पानी के लिए जूझ रहे हैं, जबकि बीएमसी की 10 प्रतिशत अनिवार्य जलकटौती ने हालात को और गंभीर बना दिया है। अंधेरी, घाटकोपर, चेंबूर, कुर्ला, गोवंडी, साकीनाका, मानखुर्द, वडाला और परेल जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में पानी को लेकर त्राहिमाम मचा हुआ है।

बीएमसी द्वारा 15 मई से लागू की गई जलकटौती को पंद्रह दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन यह संकट कब समाप्त होगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। नगर प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली सातों झीलों का जलस्तर संतोषजनक नहीं हो जाता, तब तक कटौती जारी रहेगी।

मुंबई की प्यास बढ़ी, झीलों का दम टूटा

मुंबई को पानी उपलब्ध कराने वाली सातों झीलों में जलसंग्रहण खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है। बीएमसी के आंकड़ों के अनुसार झीलों में महज 15 प्रतिशत जलभंडार बचा है, जो लगभग 45 दिनों की आपूर्ति के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। यदि मानसून ने समय पर दस्तक नहीं दी या अपेक्षित वर्षा नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं।

ऊंची इमारतों और अंतिम छोर की बस्तियों में सबसे ज्यादा संकट

कम दबाव से हो रही जलापूर्ति का सबसे बड़ा असर उन इलाकों पर पड़ रहा है जो ऊंचाई पर स्थित हैं या मुख्य पाइपलाइन के अंतिम छोर पर बसे हुए हैं। कई सोसायटियों में पानी का दबाव इतना कम है कि टंकियां पूरी तरह भर ही नहीं पा रहीं। लोगों को रात-रात भर जागकर पानी भरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

टैंकरों पर बढ़ी निर्भरता, जेब पर दोहरी मार

सरकारी सप्लाई कमजोर पड़ने के बाद बड़ी संख्या में लोग निजी पानी के टैंकरों का सहारा लेने को मजबूर हैं। मांग बढ़ने के साथ ही टैंकरों की कीमतों में भी उछाल देखा जा रहा है। कई इलाकों में टैंकर बुकिंग के लिए लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है, जिससे आम नागरिकों की परेशानी और बढ़ गई है।

पानी चोरों पर बीएमसी का शिकंजा

जलसंकट के बीच बीएमसी ने अवैध तरीके से पानी खींचने वालों के खिलाफ सख्त अभियान छेड़ दिया है। मुख्य पाइपलाइनों पर लगे अवैध इलेक्ट्रिक सक्शन पंप और बूस्टर मशीनों को जब्त करने के लिए विशेष फ्लाइंग स्क्वाड लगातार छापेमारी कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि ऐसे अवैध कनेक्शनों पर लगाम लगाकर समान जलवितरण सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।

मानसून ही अब आखिरी उम्मीद

हालांकि बुधवार को मुंबई के कुछ हिस्सों में हुई अच्छी बारिश ने लोगों को थोड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जलसंकट से वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब झील क्षेत्रों में लगातार और भारी वर्षा होगी। फिलहाल मुंबई की नजरें आसमान पर टिकी हैं, क्योंकि मानसून की मेहरबानी ही महानगर की बुझती प्यास को शांत कर सकती है।

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