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‘खालसा टैक्स’ से बढ़ा पंजाब-हिमाचल विवाद

by trilokvivechana
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एंट्री टैक्स के विरोध में निहंगों ने शुरू की वसूली, सीमा पर नया तनाव

हिमाचल के वाहनों से ली जा रही राशि, प्रशासन ने जताई आपत्ति; सामाजिक कार्यों के लिए उपयोग का दावा

चंडीगढ़/कीरतपुर साहिब। पंजाब और हिमाचल प्रदेश के बीच एंट्री टैक्स को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बाहरी राज्यों के वाहनों पर लगाए गए प्रवेश शुल्क के विरोध में पंजाब के निहंग संगठनों ने कीरतपुर साहिब के निकट मोड़ा टोल प्लाजा के पास हिमाचल नंबर के वाहनों से ‘खालसा राज टैक्स’ के नाम पर राशि एकत्र करना शुरू कर दिया है। इस कदम ने दोनों राज्यों के बीच राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, निहंग संगठनों द्वारा कार चालकों से 100 रुपये, हल्के व्यावसायिक वाहनों से 200 रुपये तथा बड़े वाहनों से 300 से 500 रुपये तक की राशि ली जा रही है। हालांकि इसे अनिवार्य कर नहीं बताया जा रहा, लेकिन सीमा क्षेत्र में चल रही इस वसूली ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

निहंग नेताओं का कहना है कि एकत्र की जा रही राशि किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि ‘सरबत के भले’ यानी जनकल्याण, धार्मिक सेवाओं और सामाजिक कार्यों पर खर्च की जाएगी। दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि किसी भी प्रकार की कर वसूली केवल सरकारी अधिकार क्षेत्र का विषय है और ऐसी गतिविधियां कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकती हैं।

दरअसल, इस विवाद की जड़ हिमाचल प्रदेश का एंट्री टैक्स है, जो 1975 के टोल अधिनियम के तहत वर्षों से लागू है। मामला तब गरमाया जब अप्रैल 2025 में शुल्क दरों में वृद्धि की गई और इसके बाद फरवरी 2026 में नई नीति के तहत निजी कारों पर प्रवेश शुल्क 70 रुपये से बढ़ाकर 170 रुपये करने का प्रस्ताव सामने आया।

इस प्रस्ताव के खिलाफ पंजाब, हरियाणा और अन्य पड़ोसी राज्यों के ट्रांसपोर्टरों, व्यापारिक संगठनों और पर्यटक समूहों ने तीखा विरोध दर्ज कराया। विरोध बढ़ने पर हिमाचल प्रदेश सरकार को कदम पीछे खींचना पड़ा। 31 मार्च 2026 को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राहत की घोषणा करते हुए निजी कारों पर शुल्क 100 रुपये और भारी वाहनों के लिए 800 रुपये निर्धारित किया।

हालांकि सरकार की ओर से संशोधन किए जाने के बावजूद असंतोष पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। सीमा से जुड़े क्षेत्रों में यह मुद्दा अब केवल आर्थिक नहीं, बल्कि क्षेत्रीय अस्मिता और राजनीतिक संदेश का विषय बनता दिखाई दे रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों राज्य सरकारें आपसी संवाद और सहमति का रास्ता नहीं निकालतीं, तो यह विवाद आगे चलकर परिवहन, व्यापार और पर्यटन पर भी असर डाल सकता है। फिलहाल ‘खालसा टैक्स’ की शुरुआत ने एंट्री टैक्स के पुराने विवाद को एक नए आयाम में ला खड़ा किया है और सीमा क्षेत्र की गतिविधियों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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