Home ताजा खबरसांसद कोटे के घर दिलाने के नाम पर 1.12 करोड़ की कथित ठगी

सांसद कोटे के घर दिलाने के नाम पर 1.12 करोड़ की कथित ठगी

by trilokvivechana
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फर्जी अलॉटमेंट लेटर और नकली दस्तावेजों के सहारे छह लोगों को बनाया शिकार, डोंगरी पुलिस ने दर्ज किया मामला

मुंबई, 5 जून। मुंबई में सस्ते मकान का सपना दिखाकर करोड़ों रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। डोंगरी पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ 1 करोड़ 12 लाख रुपये की ठगी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि आरोपियों ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताते हुए और सांसद कोटे से फ्लैट दिलाने का भरोसा देकर छह लोगों को अपने जाल में फंसा लिया।

पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता शयफान मकबूल शेख ने डोंगरी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई शिकायत में बताया है कि जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच आरोपियों ने उन्हें और अन्य पीड़ितों को कुरेश नगर, कुर्ला स्थित एक आवासीय परियोजना में कम कीमत पर फ्लैट उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया। दावा किया गया कि ये मकान मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (एमटीएचएल) परियोजना से प्रभावित लोगों के लिए विकसित की गई इमारत में उपलब्ध हैं और विशेष कोटे के माध्यम से आवंटित किए जा सकते हैं।

शिकायत के मुताबिक आरोपियों ने पीड़ितों को यह विश्वास दिलाया कि संबंधित फ्लैट सांसद कोटे से उपलब्ध कराए जा रहे हैं और भविष्य में उनके नाम पर मालिकाना हक के साथ हस्तांतरित कर दिए जाएंगे। इस भरोसे के आधार पर पीड़ितों से ऑनलाइन और नकद माध्यम से कुल 1.12 करोड़ रुपये लिए गए।

आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपियों ने पीड़ितों को आवंटन पत्र, कब्जा रसीद और अन्य दस्तावेज सौंपे, जो बाद में कथित रूप से फर्जी पाए गए। दस्तावेजों पर सरकारी संस्थाओं जैसी मुहरें, हस्ताक्षर और प्रतीक चिह्न लगाए गए थे, जिससे उनकी प्रामाणिकता का आभास हो रहा था। पीड़ितों का दावा है कि उन्हें इन फ्लैटों में प्रवेश भी दिलाया गया, लेकिन बाद में पूरा मामला संदिग्ध होने का पता चला।

मामले में युनूस शेख, सचिन यादव, हनुमंत देवधरकर, अक्षय रुपवते और फैसल नामक व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया गया है। पुलिस अब धन के लेन-देन, दस्तावेजों की सत्यता और कथित नेटवर्क की जांच कर रही है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि मामले में और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किसी संगठित गिरोह की भूमिका तो नहीं थी। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है।

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