Home राजनीतिराज्यउत्तर प्रदेशधार्मिक स्थलों को आरटीआई के दायरे में लाने की उठी मांग, सपा सांसद का बड़ा बयान

धार्मिक स्थलों को आरटीआई के दायरे में लाने की उठी मांग, सपा सांसद का बड़ा बयान

by trilokvivechana
0 comments

लखनऊ। अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया उबाल आ गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मामले को उठाए जाने के बाद अब चंदौली से सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि मामले की जांच हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा न्यायाधीशों की निगरानी में कराई जानी चाहिए तथा पूरे घटनाक्रम पर श्वेत पत्र जारी कर जनता के सामने तथ्य रखे जाने चाहिए।

एबीपी न्यूज से बातचीत के दौरान वीरेंद्र सिंह ने कहा कि केवल अयोध्या ही नहीं, बल्कि देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे में लाया जाना चाहिए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। उनके इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर सपा सांसद ने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच लगातार सकारात्मक बातचीत चल रही है। सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला दोनों दलों का राष्ट्रीय नेतृत्व करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन के लिए सीटों की संख्या से अधिक महत्वपूर्ण जीत है। उनके अनुसार, कांग्रेस को 100 से अधिक सीटें भी मिल सकती हैं और उससे कम भी, लेकिन प्राथमिकता ऐसे उम्मीदवारों को दी जाएगी जो जीत सुनिश्चित कर सकें।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के उत्तर प्रदेश में सक्रिय होने के सवाल पर वीरेंद्र सिंह ने तीखा हमला बोला। उन्होंने ओवैसी की पार्टी को भारतीय जनता पार्टी की ‘बी टीम’ करार देते हुए आरोप लगाया कि कई राज्यों में उनकी राजनीतिक भूमिका भाजपा को लाभ पहुंचाने वाली रही है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पास मुस्लिम समाज से जुड़े ऐसे अनेक नेता हैं, जो किसी भी मायने में ओवैसी से कम नहीं हैं।

सपा सांसद ने पार्टी सांसद जावेद अली के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जहां कट्टरता हावी होती है, वहां सामाजिक सौहार्द कमजोर पड़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों के राजनीतिक घटनाक्रम इस बात का उदाहरण हैं।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद से शुरू हुई बहस अब न्यायिक जांच, पारदर्शिता, विपक्षी गठबंधन और सांप्रदायिक राजनीति जैसे कई मुद्दों तक पहुंच गई है, जिससे उत्तर प्रदेश की सियासत आने वाले दिनों में और गर्माने के संकेत दे रही है।

You may also like

Leave a Comment

Are you sure want to unlock this post?
Unlock left : 0
Are you sure want to cancel subscription?
-
00:00
00:00
Update Required Flash plugin
-
00:00
00:00