ठाणे: ठाणे शहर में बारिश ने एक बड़ा घोटाला उजागर कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा आवंटित 605 करोड़ रुपये की लागत से बनी नई सड़कें बरसात के पहले ही दौर में उखड़ गईं। इन सड़कों के निर्माण कार्य को लेकर अब निकृष्ट दर्जे का काम और भारी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों ने इस मामले में ठाणे मनपा आयुक्त सौरव राव से शिकायत की है और घटिया काम करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।
ठाणे शहर की खस्ता हालत सड़कों को दुरुस्त करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने अपने कार्यकाल में राज्य सरकार की ओर से 605 करोड़ रुपये का फंड मंजूर किया था। कोविड-19 महामारी के बाद ठाणे महानगरपालिका (टीएमसी) की वित्तीय स्थिति बेहद खराब थी। ऐसे में विकास कार्य ठप पड़ गए थे। इस वजह से शहर की मुख्य और आंतरिक सड़कें गड्ढों से भर गई थीं। इस वित्तीय सहायता का उपयोग शहर के अलग-अलग हिस्सों में कंक्रीट, मैस्टिक, यूटीडब्ल्यूटी (UTWT) और डामरीकरण के जरिए नई सड़कें बनाने और पुरानी सड़कों की मरम्मत के लिए किया गया था।
मनसे पदाधिकारी स्वप्निल महिंद्राकर और अन्य विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि इन सड़कों का निर्माण बेहद घटिया स्तर पर किया गया। बरसात शुरू होते ही इन सड़कों की परतें उखड़ने लगीं, जगह-जगह गड्ढे हो गए और लोगों के लिए आवाजाही मुश्किल हो गई। महिंद्राकर का कहना है कि सरकारी धन का भारी पैमाने पर दुरुपयोग हुआ है और यह एक सुनियोजित भ्रष्टाचार का मामला है। स्थानीय नागरिक भी यही कहते हैं कि सड़कों पर करोड़ों खर्च करने के बावजूद नतीजा शून्य है। कई जगहों पर पानी भरने और गड्ढों की वजह से हादसों का खतरा बढ़ गया है।
शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि सरकारी नियमों का खुला उल्लंघन किया गया। नियमों के मुताबिक, ऐसे इलाकों की सड़कों पर सरकारी धन से मरम्मत नहीं की जानी चाहिए जहां भविष्य में जलापूर्ति, गैस, टेलीकॉम या अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए खुदाई होनी है। इसके बावजूद ठाणे के कई इलाकों—जैसे घोड़बंदर रोड, वर्तक नगर, लोकमान्य नगर, वागले एस्टेट, पोखरण रोड और अन्य हिस्सों में अमृत योजना के तहत जल निकासी और पाइपलाइन के लिए खुदाई की गई। इससे नई बनी सड़कें टूट गईं और करोड़ों रुपये पानी में बह गए।
शिकायत में स्पष्ट कहा गया है कि ठाणे मनपा के कई अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया है। निकृष्ट दर्जे का काम कराकर फाइलों में काम पूरा दिखा दिया गया और सरकारी धन की बर्बादी कर दी गई। राजनीतिक दलों के नेताओं ने मांग की है कि इस मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही, बरसात में खराब हुई सड़कों की तत्काल मरम्मत सुनिश्चित की जाए ताकि नागरिकों को राहत मिल सके। शहरवासियों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी उन्हें टूटी-फूटी और गड्ढों से भरी सड़कें ही मिली हैं। बरसात में सड़कों की यह हालत न केवल वाहनों के लिए बल्कि पैदल चलने वालों के लिए भी खतरनाक है। कई जगह हादसों की खबरें सामने आ चुकी हैं।
यह मुद्दा अब ठाणे की राजनीति में भी बड़ा विवाद बनता जा रहा है। विपक्षी दलों ने सीधे-सीधे राज्य सरकार और ठाणे मनपा प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि जनता का पैसा पानी में बहा दिया गया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। फिलहाल ठाणे मनपा आयुक्त ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की है। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले पर जांच समिति बनाई जाएगी। हालांकि, विपक्षी नेताओं का कहना है कि जांच महज औपचारिकता नहीं होनी चाहिए बल्कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
