लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दावे के अनुसार यदि किसी महिला को कोई मनचला छेड़छाड़ किया तो अगले चौराहे पर पुलिस उसको सबक सिखा देंगी। रात में 12 बजे कोई महिला सोने-चांदी के आभूषण पहन कर घूमे तो भी वह अपने घर सुरक्षित पहुंचेगी। किसी की हिम्मत नहीं है जो उस पर बुरी निगाह डाले। योगी के दावे को तार-तार करते हुये फर्रुखाबाद में दवा लेने के लिए घर से निकली 33 वर्षीय महिला को छह लोगों के एक समूह ने कथित तौर पर आग लगा दी। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार मृतका की पहचान निशा सिंह के रूप में हुई है, जो चौरई गांव की रहने वाली थी। वह 6 सितंबर को स्कूटर से दवा लेने के लिए निकली थी। लेकिन कुछ घंटों बाद वह गंभीर रूप से झुलसी हुई हालत में पास के एक निजी अस्पताल में भर्ती मिली। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसके पिता बलराम सिंह को फोन किया। इसके बाद निशा को तुरंत जिला अस्पताल रेफर किया गया और फिर हालत बिगड़ने पर लगभग 100 किलोमीटर दूर सैफई मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
मरने से पहले बयान
परिजनों का दावा है कि मरने से पहले निशा ने अपने पिता को बताया कि एक युवक दीपक सिंह उस पर फोन पर बात करने का दबाव बना रहा था। निशा के मुताबिक, जब उसने उसकी बात मानने से इनकार कर दिया, तो दीपक ने अपने पांच साथियों के साथ मिलकर उसे पकड़ लिया और गांव के एक स्कूल के पीछे स्थित बाग में आग के हवाले कर दिया।
निशा दो बच्चों की मां थी। उसका पति अमित चौहान दिल्ली में नौकरी करता है। घर में 11 वर्षीय रुद्र और 8 वर्षीय शौर्य नाम के दो बेटे हैं। अचानक हुई इस घटना ने पूरे परिवार को तोड़ कर रख दिया है।
परिजनों के गंभीर आरोप
निशा के पिता बलराम सिंह ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी पूरी तरह से होश में थी और उसने खुद बताया कि दीपक सिंह और उसके पांच साथियों ने मिलकर यह घिनौना कृत्य किया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाया कि निशा के कपड़े बदल दिए गए। उनके अनुसार, जब वह घर से निकली थी तब सलवार-सूट पहने थी, लेकिन अस्पताल में उसे हाफ ट्राउजर और गोल गले की बनियान में पाया गया। परिवार का कहना है कि यह कपड़े बदलने की साजिश है ताकि मामले को दबाया जा सके।
पुलिस की कार्रवाई
पुलिस ने पीड़िता के पिता की तहरीर पर आरोपी दीपक सिंह और उसके पांच साथियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। फर्रुखाबाद के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि आरोपियों की तलाश में कई टीमें गठित की गई हैं और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। वहीं, कपड़े बदलने के आरोपों पर भी जांच शुरू कर दी गई है।
अस्पताल प्रशासन पर सवाल
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल प्रशासन ने मामले को सही तरीके से दर्ज नहीं किया और लापरवाही दिखाई। जिस तरह से पीड़िता को अस्पताल में अलग कपड़ों में पाया गया, उसने परिवार का गुस्सा और बढ़ा दिया है। इस पूरे मामले में मेडिकल जांच और पुलिस की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि कपड़े क्यों बदले गए।
सुरक्षा पर सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कई बार दावा कर चुके हैं कि यूपी में महिलाएं रात में भी सुरक्षित निकल सकती हैं। लेकिन इस घटना ने उन दावों की पोल खोल दी है। विपक्षी दलों ने भी इस घटना को लेकर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यूपी में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं और कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।
महिलाओं पर अत्याचार की बढ़ती घटनाएं
उत्तर प्रदेश में हाल के दिनों में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लगातार इजाफा हुआ है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में महिलाओं पर अत्याचार के मामलों की संख्या देश में सबसे अधिक है। बलात्कार, छेड़छाड़, दहेज हत्या और आगजनी जैसे अपराधों में यूपी शीर्ष पर रहा है। निशा सिंह की मौत ने इन आंकड़ों को फिर से जीवंत कर दिया है।
