Home राजनीतिराज्यमहाराष्ट्रअंधेरी पूर्व में माता की चौकी का भव्य आयोजन, भक्तों की उमड़ी भीड़

अंधेरी पूर्व में माता की चौकी का भव्य आयोजन, भक्तों की उमड़ी भीड़

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मुंबई। नवरात्रि के पावन अवसर पर पूरे महानगर में धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। जगह-जगह नवरात्रोत्सव के अंतर्गत डांडिया, गरबा और माता की चौकी जैसे सांस्कृतिक व धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में अंधेरी विधानसभा पूर्व के वार्ड 79 में मुंबई भाजपा के सचिव और अजय चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष अजय तिवारी की ओर से माता की चौकी का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्रीय श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया और वातावरण देवी भक्ति के सुरों से गूंज उठा।

कार्यक्रम में अंधेरी पूर्व के विधायक मुरजी भाई पटेल, श्री सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष आचार्य पवन त्रिपाठी, भाजपा के उत्तर पश्चिम जिला अध्यक्ष ज्ञान मूर्ति शर्मा, वरिष्ठ कार्यकर्ता भाऊ इंद्रसेन उपाध्याय, प्रमोद पांडे, अखिलेश सिंह, साहब लाल चौबे, जय प्रकाश सिंह, जय प्रकाश चौबे, बाबा यादव, हरिशंकर यादव, प्रभाकर मिश्रा और ओपी तिवारी जैसे कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंडल अध्यक्ष राखी गुप्ता सहित भाजपा के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की भी भारी उपस्थिति रही।

माता की चौकी में श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के माध्यम से देवी अंबे की आराधना की। संगीत और गायन से सजे इस कार्यक्रम में भक्त भावविभोर होकर झूमते और माता के जयकारे लगाते दिखाई दिए। कार्यक्रम के दौरान भक्तों ने सामूहिक रूप से देवी की महिमा का गुणगान किया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो गया।

आयोजन के अंत में मुंबई भाजपा के सचिव और अजय चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष अजय तिवारी ने माता की चौकी में पधारे सभी अतिथियों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से शाखा प्रमुख अमित मांतोडकर, पूर्व मोगरा गणपति मंडल के अध्यक्ष राजेश हटवार और नवरात्रि उत्सव मंडल के पदाधिकारियों का भी धन्यवाद दिया। तिवारी ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का कार्य करते हैं और परंपरा के संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं।

नवरात्रि के पावन अवसर पर आयोजित इस माता की चौकी ने न केवल स्थानीय नागरिकों को एक साथ जोड़ने का काम किया, बल्कि भक्तों को अध्यात्म और भक्ति में सराबोर होने का अवसर भी दिया। श्रद्धालुओं का उत्साह और बड़ी संख्या में उनकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण रही कि ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिकता की मिसाल भी प्रस्तुत करते हैं।

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