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स्थानीय चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने की तैयारी, कार्यकर्ताओं की भावना का सम्मान जरूरी-सपकाल

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बुलढाणा। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा है कि स्थानीय स्वराज संस्थाओं के आगामी चुनावों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं की इच्छा स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की है और पार्टी इस भावना का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि लोकसभा व विधानसभा चुनावों का अनुभव दिखाता है कि गठबंधन की रणनीतियाँ अलग-अलग परिणाम देती हैं, इसलिए अब धैर्य और वास्तविकता आधारित निर्णय लेने का समय है।

पत्रकारों से बातचीत में सपकाल ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दो पूरी तरह भिन्न विचारधाराएँ हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस को समाप्त करने के उद्देश्य से ही आरएसएस की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि देश में भाजपा-आरएसएस की नीतियाँ केवल कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुँचाने वाली हैं, जबकि कांग्रेस का संघर्ष देश के बहुसंख्यक वर्ग के लिए है।

सपकाल ने दावा किया कि भाजपा और पूंजीपतियों के खिलाफ सबसे बड़ी लड़ाई कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छेड़ी है और अन्य विपक्षी दलों को भी इस वैचारिक संघर्ष में साथ आना चाहिए।

उन्होंने याद दिलाया कि महाविकास आघाड़ी ने लोकसभा चुनाव एकजुट होकर लड़ा और सफलता भी पाई, लेकिन विधानसभा में परिणाम अनुकूल नहीं आए। इसी अनुभव के आधार पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में स्थानीय चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने की भावना उभर रही है।

इंडिया गठबंधन, वंचित बहुजन आघाड़ी और कांग्रेस की आगे की रणनीति

“गठबंधन तोड़ने का सवाल नहीं, बातचीत से हल संभव”

इंडिया गठबंधन में शामिल होने या नए दल जोड़ने को लेकर सपकाल ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर लिया जाता है। उन्होंने कहा कि किसी दल को शामिल करने के लिए प्रस्ताव आवश्यक है, और जब प्रस्ताव ही सामने नहीं है तो चर्चा का कोई आधार नहीं बनता।

वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ गठबंधन पर बोलते हुए सपकाल ने कहा कि दोनों दलों के स्थानीय नेताओं को गठबंधन बनाने की छूट दी गई थी और जिला स्तर पर हुई चर्चा के आधार पर सहमति भी बनी थी। बाद में कुछ कारणों से संवाद बाधित हुआ, जिसके चलते दो-दो नामांकन दाखिल होने जैसी परिस्थिति उत्पन्न हुई। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों दलों के कार्यकर्ताओं की भावना गठबंधन जारी रखने की है और इसे तोड़ने का सवाल ही नहीं उठता।

सपकाल के अनुसार, कांग्रेस इस स्थिति से आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक कदम उठाएगी। उन्होंने कहा कि संविधानवादी दलों को शिव, शाहू और फुले की विचारधारा को आगे ले जाने के लिए एक साथ आना होगा। इस दिशा में कांग्रेस संवाद और तालमेल की रणनीति जारी रखेगी।

सपकाल के बयानों ने महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस स्वतंत्र रूप से उतरती है या फिर नए सिरे से तालमेल की राह तलाशती है।

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