महाराष्ट्र के Nanded से सामने आई यह घटना सिर्फ एक प्रेम कहानी का अंत नहीं, बल्कि उस जहरीली सोच का खौफनाक चेहरा है, जो आज भी जाति, इज्जत और झूठे सामाजिक दबाव के नाम पर प्यार की हत्या कर देती है। जिस लड़की ने अपने प्रेमी के साथ सात जन्मों के सपने देखे थे, उसी प्रेमी के शव के साथ उसे सात फेरे लेने पड़े। यह कहानी है आंचल और सक्षम की — प्रेम, विश्वास और बेरहमी से कुचले गए सपनों की कहानी।
मामला नांदेड़ शहर के जूना घाट (जूना गंज) इलाके का है। आंचल और सक्षम एक-दूसरे से तीन साल से प्रेम करते थे। दोनों अलग-अलग जाति से थे, जो आंचल के परिवार को स्वीकार नहीं था। परिजनों का विरोध वक्त के साथ नफरत में बदलता चला गया। आरोप है कि इसी नफरत ने सक्षम की जान ले ली। आंचल के पिता और भाई पर सक्षम की हत्या का गंभीर आरोप है। बताया जाता है कि पहले उसे बेरहमी से पीटा गया, फिर सिर में गोली मारी गई और बाद में पत्थर से सिर कुचल दिया गया, ताकि उसकी सांसें पूरी तरह थम जाएं।
इस दर्दनाक घटना के बाद आंचल ने अपने प्रेमी के शव के साथ शादी कर पूरे देश को झकझोर दिया। फेरों के दौरान आंचल के शब्द हर दिल को चीर देने वाले थे—“मैं विधवा नहीं, सक्षम की दुल्हन हूं। मौत भी हमें जुदा नहीं कर सकती।” वह दृश्य केवल एक रस्म नहीं था, बल्कि उस समाज के मुंह पर करारा तमाचा था, जो प्रेम को गुनाह मानता है।
आंचल ने अपनी दर्दभरी दास्तान त्रिलोक विवेचना के साथ साझा की। उसने बताया, “हमने साथ जीने-मरने के सपने देखे थे। मुझे जरा भी अंदाज़ा नहीं था कि मेरे घर वाले उसे मार डालेंगे।” आंचल के मुताबिक 27 नवंबर की रात करीब 11 से 12 बजे के बीच उसका छोटा भाई हीमेश उसे पुलिस स्टेशन ले गया। वहां उस पर दबाव बनाया गया कि वह सक्षम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए। आंचल के इनकार करने पर उसका भाई बौखला गया।
आंचल का आरोप है कि उसी रात थाने में मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों ने उसके भाई से कहा, “जिस लड़के ने तेरी बहन को फंसाया है, उसे तू ही क्यों नहीं मार देता?” आंचल के अनुसार उसके भाई ने गुस्से में कहा था, “आज रात तक उसे मारकर यहीं आ जाऊंगा।” आंचल का कहना है कि उसने कभी नहीं सोचा था कि उसका भाई इस हद तक चला जाएगा।
हत्या के बाद जब आंचल मौके पर पहुंची तो सक्षम की हालत देख वह टूट गई। पुलिस भी शव की हालत देखकर दंग रह गई। सिर कुचला हुआ था, शरीर पर बेरहमी से पिटाई के निशान थे। इसके बाद ही आंचल ने वह फैसला लिया, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया—उसने सक्षम के शव के साथ शादी कर ली।
आज आंचल इंसाफ की लड़ाई अकेले लड़ रही है। उसने साफ शब्दों में कहा है, “जिन लोगों ने सक्षम को इतनी बेरहमी से मारा है, उन्हें भी सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। कानून उन्हें फांसी दे।” उसका कहना है कि अब वह सक्षम के माता-पिता के साथ रहेगी और “बेटा बनकर” उनकी सेवा करेगी। “सक्षम ने मेरे साथ जो सपने देखे थे, मैं उन्हें पूरा करूंगी,” आंचल की आंखों में आंसू और आवाज़ में जिद साफ झलकती है।
नांदेड़ की यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है—क्या आज भी प्यार करना गुनाह है? क्या जाति और झूठी इज्जत इंसान की जान से बड़ी हो गई है? आंचल और सक्षम की यह कहानी समाज के चेहरे पर पड़ा वह दाग है, जिसे मिटाने के लिए सिर्फ कानून नहीं, सोच को भी बदलना होगा।
