Home ताजा खबरराजस्थान का ‘डॉक्टर डेथ’: टैक्सी ड्राइवरों का कातिल, शव मगरमच्छों को खिलाकर मिटाता था सबूत

राजस्थान का ‘डॉक्टर डेथ’: टैक्सी ड्राइवरों का कातिल, शव मगरमच्छों को खिलाकर मिटाता था सबूत

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मई महीने में दिल्ली पुलिस ने एक बार फिर उस खौफनाक नाम को पकड़ लिया, जिसने अपराध की दुनिया में इंसानियत को शर्मसार कर दिया था। ‘डॉक्टर डेथ’ के नाम से कुख्यात सीरियल किलर देवेंद्र शर्मा को राजस्थान के दौसा जिले में स्थित एक आश्रम से गिरफ्तार किया गया। हैरानी की बात यह है कि 67 वर्षीय देवेंद्र शर्मा, जो पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर था, पिछले वर्ष पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद फरार हो गया था और लंबे समय से पुजारी के वेश में रह रहा था।

टैक्सी और ट्रक चालकों को बनाता था शिकार

पुलिस जांच में सामने आया है कि देवेंद्र शर्मा अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी यात्राओं के बहाने टैक्सी और ट्रक चालकों को बुलाता था। सुनसान रास्तों में ले जाकर उनकी बेरहमी से हत्या कर दी जाती थी। हत्या के बाद मृतकों के वाहन ‘ग्रे मार्केट’ में बेच दिए जाते थे, जिससे गिरोह को मोटी रकम हासिल होती थी।

अपराध को पूरी तरह छिपाने के लिए शवों को उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में स्थित हजारा नहर में फेंक दिया जाता था। इस नहर में बड़ी संख्या में मगरमच्छ मौजूद हैं। पुलिस का मानना है कि मगरमच्छों के कारण शव पूरी तरह नष्ट हो जाते थे, जिससे किसी तरह का सबूत नहीं बचता था।

अदालतें सुना चुकी हैं मृत्युदंड तक

देवेंद्र शर्मा को दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा में दर्ज सात अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है। इतना ही नहीं, गुरुग्राम की एक अदालत उसे मृत्युदंड की सजा भी दे चुकी है। डिप्टी पुलिस कमिश्नर आदित्य गौतम के अनुसार, देवेंद्र शर्मा 2002 से 2004 के बीच टैक्सी और ट्रक चालकों की हत्या के कई मामलों में तिहाड़ जेल में सजा काट रहा था, लेकिन अगस्त 2023 में पैरोल पर रिहा होने के बाद फरार हो गया था।

27 से अधिक संगीन मामले दर्ज

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, देवेंद्र शर्मा पर हत्या, अपहरण और लूट के 27 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं। उसकी आपराधिक कहानी यहीं समाप्त नहीं होती। वर्ष 1998 से 2004 के बीच वह एक बड़े अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भी सक्रिय हिस्सा रहा, जिसने उसे पहली बार देशभर में कुख्यात किया।

पूछताछ में देवेंद्र शर्मा ने बताया कि 1998 में उसकी मुलाकात डॉ. अमित नामक व्यक्ति से हुई थी, जिसने दिल्ली, गुरुग्राम और अन्य शहरों में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का नेटवर्क खड़ा कर रखा था। एक किडनी के बदले 5 से 7 लाख रुपये मिलने के लालच में वह इस धंधे में शामिल हो गया।

देवेंद्र शर्मा बिहार, पश्चिम बंगाल और नेपाल के गरीब लोगों को बहला-फुसलाकर किडनी दान के लिए लाता था। इस नेटवर्क के जरिए 125 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किए गए। अंततः वर्ष 2004 में गुरुग्राम से देवेंद्र शर्मा और डॉ. अमित को गिरफ्तार किया गया।

‘डॉक्टर डेथ’ की यह कहानी सिर्फ एक अपराधी की नहीं, बल्कि उस खौफनाक मानसिकता की तस्वीर है, जिसमें लालच और बेरहमी के आगे इंसानी जान की कोई कीमत नहीं रह जाती।

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