नई दिल्ली। भारत में उपराष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को 452 वोटों के अंतर से जीत मिली है। राधाकृष्णन ने इंडिया ब्लॉक के प्रत्याशी जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को परास्त किया। यह चुनाव पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के 21 जुलाई को इस्तीफा देने के बाद कराया गया था।
चुनाव प्रक्रिया में कुल 767 सांसदों ने मतदान किया, जिसमें से 752 वोट वैध और 15 वोट अवैध पाए गए। कुल मतदान दर 98.2 प्रतिशत रही, जो चुनाव की व्यापक भागीदारी को दर्शाती है। मतदान सुबह 10 बजे शुरू हुआ और शाम 5 बजे तक जारी रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सबसे पहले मतदान कर अपना वोट डाला। इसके बाद केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अर्जुन राम मेघवाल, किरेन रिजिजू, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, भाजपा सांसद कंगना रनौत, सपा नेता राम गोपाल यादव सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने मतदान किया। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी मतदान प्रक्रिया में भाग लिया।
चुनाव के संचालन और निगरानी के लिए राज्यसभा महासचिव पीसी मोदी को रिटर्निंग ऑफिसर नियुक्त किया गया था।
चुनाव में कुछ दलों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। इनमें भारत राष्ट्र समिति के 4 राज्यसभा सांसद, बीजू जनता दल के 7 राज्यसभा सांसद, और शिरोमणि अकाली दल के 1 लोकसभा एवं 2 राज्यसभा सांसद शामिल हैं।
सीपी राधाकृष्णन की जीत NDA के लिए राजनीतिक महत्व रखती है, क्योंकि यह गठबंधन का उपराष्ट्रपति पद पर लगातार मजबूत पकड़ बनाए रखने का संकेत है। जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी प्रतिस्पर्धा ने चुनाव को संतुलित और लोकतांत्रिक रूप से निष्पक्ष बनाया।
उपराष्ट्रपति का पद देश में संवैधानिक महत्व रखता है। उपराष्ट्रपति संसद की राज्यसभा के सभापति के रूप में भी कार्य करता है और संसद के संचालन में उसकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है। नए उपराष्ट्रपति के चुनाव से पहले उपराष्ट्रपति पद रिक्त था, जिसका कारण जगदीप धनखड़ का इस्तीफा था।
इस चुनाव के परिणाम से स्पष्ट होता है कि NDA का प्रभाव देश के संवैधानिक पदों पर बरकरार है, जबकि विपक्ष ने भी अपने उम्मीदवार के माध्यम से अपनी भूमिका को मजबूती से पेश किया।
इस प्रकार, सीपी राधाकृष्णन भारत के नए उपराष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल की शुरुआत करेंगे और आने वाले समय में राज्यसभा के संचालन तथा संवैधानिक जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
