मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा और वृंदावन में यमुना नदी अपने रौद्र रूप में बह रही है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया है और निचले इलाकों में हालात गंभीर हो चुके हैं। खेत-खलिहान, घर-मकान से लेकर कई मंदिर तक जलमग्न हो गए हैं। इसी बीच वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज अपने शिष्यों के साथ बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का निरीक्षण करने पहुंचे। वे स्टीमर के जरिए उन जगहों तक गए जो पूरी तरह से पानी में डूबे हुए हैं और शांत भाव से यमुना के इस रूप को देखते रहे।
बाढ़ की वजह से हजारों लोग घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। बांके बिहारी मंदिर तक जाने वाले वीआईपी मार्ग पर चार से पांच फीट पानी भर गया है। इसके चलते स्थानीय लोगों के साथ-साथ दर्शन करने आए श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि जिला प्रशासन की टीमें लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और बचाव कार्य में जुटी हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में संत प्रेमानंद महाराज ने कहा कि यमुना का यह रूप किसी ईश्वरीय प्रकोप के रूप में नहीं, बल्कि प्रकृति की एक प्रक्रिया के तौर पर देखना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि इस समय घबराने के बजाय धैर्य और साहस से काम लें। उन्होंने कहा कि यह प्रभु की लीला है और हमें इसे उसी भाव से स्वीकार करना चाहिए।
संत प्रेमानंद महाराज ने इस कठिन परिस्थिति में सामूहिक सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वृंदावन में हजारों लोग भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं से वंचित हैं। न पानी की समुचित व्यवस्था है और न ही बिजली उपलब्ध है। ऐसे में समाज के सभी वर्गों को मिलकर आगे आना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने सामर्थ्य के अनुसार भोजन के पैकेट और अन्य आवश्यक मदद तैयार कर बाढ़ पीड़ितों तक पहुंचाएं, ताकि कोई भी भूखा न रहे।
स्थानीय लोग भी मानते हैं कि बाढ़ ने उनके जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है, लेकिन वे प्रशासन और सामाजिक संगठनों से मदद मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं संत प्रेमानंद महाराज का संदेश लोगों के बीच साहस और उम्मीद की नई किरण लेकर आया है। बाढ़ग्रस्त इलाकों में फिलहाल हालात गंभीर बने हुए हैं, लेकिन प्रशासन के साथ-साथ संत समाज की अपील से राहत और बचाव कार्यों में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
