नागपुर : महाराष्ट्र का महत्वाकांक्षी नागपुर-मुंबई समृद्धि महामार्ग एक बार फिर विवादों में आ गया है। मंगलवार देर रात एक्सप्रेसवे पर एक ऐसा वाकया सामने आया, जिसने यात्रियों और प्रशासन दोनों को सकते में डाल दिया। जानकारी के अनुसार, नागपुर से मुंबई की ओर जाने वाले इस एक्सप्रेसवे के एक पुल पर कई मीटर तक बड़ी-बड़ी कीलें ठोक दी गईं। इन कीलों की वजह से कई वाहनों के टायर फट गए, लोग रात के समय असमंजस और परेशानी में फंस गए और कई हादसे होने से बाल-बाल बचे।
आधी रात की अफरातफरी
घटना मंगलवार की देर रात की है। एक्सप्रेसवे पर चल रहे वाहनों को अचानक झटका लगा जब कई गाड़ियों के पहिए एक साथ पंचर हो गए। कुछ वाहन सड़क पर ही रुक गए, तो कुछ ने धीमी रफ्तार में एक्सप्रेसवे पार करने की कोशिश की। वहां मौजूद लोगों ने जब ध्यान से देखा, तो पाया कि सड़क की सतह पर कतारों में सैकड़ों कीलें गड़ी हुई थीं। इस नजारे को देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। कुछ राहगीरों ने तुरंत मोबाइल से वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो सामने आते ही यह मामला चर्चा का विषय बन गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुल के एक हिस्से पर कीलों की लंबी कतार ठोकी गई थी और उसके बगल से वाहन बहुत धीमी रफ्तार से निकल रहे थे।
https://www.facebook.com/share/r/177M7CXgZp/
साजिश या लापरवाही?
शुरुआत में लोगों ने इसे बड़ी साजिश करार दिया। सवाल उठे कि आखिर इतनी लंबाई तक कीलें कैसे ठोकी गईं और इसकी भनक पुलिस या प्रशासन को क्यों नहीं लगी? लोगों का आरोप था कि अगर किसी की गाड़ी तेज रफ्तार में पंचर होती, तो बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। हालांकि कुछ ही देर बाद राज खुला कि यह काम किसी असामाजिक तत्व ने नहीं, बल्कि सड़क मरम्मत का काम कर रही एक निर्माण कंपनी ने किया था। बताया गया कि कंपनी ने सड़क की दरारों को अस्थायी रूप से भरने और सतह को मजबूत करने के लिए यह तरीका अपनाया था। लेकिन सवाल यह है कि बिना किसी चेतावनी, बैरिकेडिंग या साइनबोर्ड के इस तरह का जोखिमपूर्ण तरीका क्यों अपनाया गया?
यात्रियों का आक्रोश
घटना के बाद से सोशल मीडिया पर यात्रियों और आम लोगों ने अपनी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना था कि अगर सड़क मरम्मत का कार्य हो रहा था, तो इसे सुरक्षित तरीके से और दिन के समय किया जाना चाहिए था। रात में कीलें ठोककर ट्रैफिक में चल रहे वाहनों को खतरे में डालना न केवल लापरवाही है, बल्कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ है। वाहन चालकों ने सवाल उठाया कि कीलें लगाने से पहले संबंधित विभाग ने बैरिकेड क्यों नहीं लगाए और मरम्मत स्थल की जानकारी यात्रियों को क्यों नहीं दी गई?
हादसे का खतरा टला, लेकिन डर कायम
हालांकि इस घटना में किसी बड़े हादसे या जनहानि की खबर नहीं है, लेकिन यात्रियों का कहना है कि कई लोग बाल-बाल बचे। एक्सप्रेसवे पर वाहन आमतौर पर बहुत तेज गति से चलते हैं। ऐसे में अचानक टायर पंचर होना वाहन नियंत्रण खोने और गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता था। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद गंभीर चूक है।
विवादों में समृद्धि महामार्ग
समृद्धि महामार्ग, जिसे नागपुर-मुंबई सुपर कम्युनिकेशन एक्सप्रेसवे भी कहा जाता है, उद्घाटन के बाद से लगातार विवादों में रहा है। आए दिन यहां हादसों की खबरें सामने आती हैं। तेज रफ्तार, अपर्याप्त सुरक्षा प्रबंध और सड़क निर्माण की खामियों को लेकर इस एक्सप्रेसवे पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
हाल ही में दहिसर टोल प्लाजा को लेकर भी विवाद सामने आया था। वहां अक्सर ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या देखने को मिलती थी। इसके बाद राज्य सरकार ने इस टोल प्लाजा को स्थानांतरित करने का निर्णय लिया।
प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
कीलों का यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है। जहां एक तरफ राज्य सरकार एक्सप्रेसवे को देश के सबसे सुरक्षित और तेज मार्ग के रूप में प्रचारित करती रही है, वहीं दूसरी ओर लगातार सामने आ रही घटनाएं इसकी विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़ी कंपनियों पर कड़ी निगरानी जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। साथ ही यात्रियों को सतर्क करने के लिए स्पष्ट साइनबोर्ड और बैरिकेडिंग का इस्तेमाल करना चाहिए।
