मुंबई। श्री शिवाजी ज्ञानपीठ (इंटरनॅशनल) संस्था और मराठी साहित्य कला सेवा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राज्यस्तरीय शिवकालीन रणरागिनी निबंध प्रतियोगिता–२०२५ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य स्वराज्य की वीरांगनाओं के शौर्य और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना था।
प्रतियोगिता में राज्यभर से अनेक प्रतिभागियों ने भाग लिया और स्वराज्य की कर्तव्यपरायण, पराक्रमी एवं प्रेरणादायी स्त्रियों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रस्तुत निबंधों में श्री अनुजजी केसरकर का “स्वराज्य कुमुखत्यार महारानी येसूबाई” विषयक निबंध निर्णायकों को सर्वाधिक प्रभावशाली और ऐतिहासिक दृष्टि से प्रासंगिक प्रतीत हुआ। परिणामस्वरूप उन्हें प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ।
विजेता अनुजजी केसरकर को सम्मानपत्र, सम्मानचिन्ह, पुष्पगुच्छ और ₹५,००० की नकद राशि से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार १५ सितंबर २०२५ को दादर स्थित शिवाजी नाट्य मंदिर में आयोजित भव्य समारोह में प्रदान किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी, इतिहासकार और विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।
परीक्षक मंडल के अनुसार, अनुजजी केसरकर का निबंध केवल महारानी येसूबाई की वीरता का चित्रण ही नहीं करता, बल्कि स्वराज्य की स्त्रियों के संघर्ष, त्याग और दूरदर्शिता का सजीव दस्तावेज प्रस्तुत करता है। उनके लेखन में ऐतिहासिक तथ्यों की गहराई और भावनात्मक अभिव्यक्ति का संतुलित मेल देखने को मिला।
आयोजक संस्था एवं परीक्षक मंडल ने सभी प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की और कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को स्वराज्य की प्रेरणादायी परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलता है।
समारोह के समापन अवसर पर आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्रपति शिवाजी महाराज और उनकी रणरागिनियों की प्रेरणा भविष्य की पीढ़ियों के हृदय में सदैव प्रज्ज्वलित रहेगी और युवाओं को साहस, कर्तव्य और त्याग के मार्ग पर अग्रसर होने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
