सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ बोर्ड संशोधन पर रोक की मांग खारिज, जमील मर्चेंट बोले– लड़ाई जारी रहेगी

मुंबई। वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लेकर दायर की गई पांच याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए पूरे संशोधन कानून पर रोक लगाने की मांग को खारिज कर दिया। इस मामले में मालाड निवासी समाजसेवी जमील मर्चेंट भी याचिकाकर्ताओं में शामिल थे। अदालत के निर्णय के बाद उन्होंने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन उनकी कुछ महत्वपूर्ण मांगों को उचित तरीके से नहीं रखा गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी कानूनी लड़ाई यहीं समाप्त नहीं होगी और वह संशोधन बिल के खिलाफ आगे भी संघर्ष जारी रखेंगे।

मर्चेंट ने बताया कि उनकी याचिका में कई बिंदुओं को समाप्त करने की मांग की गई थी, किंतु अदालत ने उन पर संतोषजनक विचार नहीं किया। यही कारण है कि वह अभी भी इस संशोधन का विरोध करते रहेंगे। उनका कहना है कि वक्फ संपत्तियों और उससे जुड़े प्रावधानों पर यह संशोधन सीधे तौर पर असर डाल सकता है, इसलिए समुदाय की आवाज उठाना ज़रूरी है।

इस मामले में केवल जमील मर्चेंट ही नहीं, बल्कि चार और बड़े नाम याचिकाकर्ताओं में शामिल थे। इनमें एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, मौलाना अरशद मदनी, मोहम्मद फजल रहीम और शेख नूर हसन के नाम प्रमुख हैं। इन सभी ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि यह संशोधन समुदाय के अधिकारों और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और संशोधन कानून पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। अदालत का कहना है कि संशोधन बिल पर फिलहाल रोक का कोई आधार नहीं है। इस फैसले से केंद्र सरकार को अस्थायी राहत मिली है, क्योंकि अब संशोधन लागू करने में कोई बाधा नहीं होगी।

फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि अदालत फिलहाल सरकार के पक्ष में खड़ी है, लेकिन याचिकाकर्ताओं ने संकेत दिया है कि वे जल्द ही अगला कदम उठाएंगे। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मामला और भी सुर्खियों में रहेगा। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय जहां सरकार के लिए राहत का सबब है, वहीं याचिकाकर्ताओं के लिए आगे की चुनौती बनकर खड़ा है।

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