Home राजनीतिराज्यमहाराष्ट्रदेखा क्या?” ने कान्स 2025 में रचा इतिहास, जीते दो बड़े अवॉर्ड्स

देखा क्या?” ने कान्स 2025 में रचा इतिहास, जीते दो बड़े अवॉर्ड्स

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भारतीय डॉक्यूड्रामा “देखा क्या?” को कान्स फिल्म फेस्टिवल में अंतरराष्ट्रीय सम्मान
सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवॉर्ड अपने नाम

मुंबई। भारतीय सिनेमा ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। रेयू फिल्म्स और आदित्य भसीन द्वारा निर्मित डॉक्यूड्रामा “देखा क्या?” ने वर्ल्ड फिल्म फेस्टिवल, कान्स 2025 में दो प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किए हैं। इस फिल्म को सर्वश्रेष्ठ डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक – डॉक्यूमेंट्री शॉर्ट के सम्मान से नवाज़ा गया है।

यह फिल्म, जिसे लोकप्रिय रेडियो शो “बोलता अंधेरा” की प्रस्तोता बन्नो ने आवाज़ दी है, फ़िरोज़ाबाद के उन बच्चों की दर्दनाक हकीकत को उजागर करती है जो चूड़ियाँ बनाने के दौरान अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। साथ ही यह उन शहरी वंचित बच्चों की स्थिति से भी तुलना करती है जो जानकारी और जागरूकता की कमी के कारण अंधेपन का शिकार हो जाते हैं। फिल्म का उद्देश्य दर्शकों को इस गंभीर मुद्दे पर सोचने और संवेदनशील होने के लिए प्रेरित करना है।

निर्देशक, लेखक और निर्माता आदित्य भसीन ने पुरस्कार मिलने के बाद अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा—”जब मैंने पहली बार संजना से सुना कि फ़िरोज़ाबाद के बच्चे चूड़ियाँ बनाने की वजह से अपनी आंखों की रोशनी गंवा रहे हैं, तो मैं इसे भूल नहीं सका। यह उन कहानियों में से एक थी जिसे बताना ज़रूरी था, क्योंकि चुप रहना अन्याय होता। मैंने सिर्फ़ वही कैद करने की कोशिश की जो मैंने महसूस किया। अगर दर्शक थोड़ी देर रुककर सोचें, तो यही मेरी सबसे बड़ी जीत होगी। कान्स के ये अवॉर्ड्स मेरे लिए बहुत मायने रखते हैं, लेकिन असल में ये उन बच्चों के हैं जिनकी आवाज़ इस फिल्म में गूंज रही है।”

यह फिल्म एनजीओ “दृष्टि” के सहयोग से बनाई गई है, जिसकी संस्थापक संजना चौहान ने समाज में बदलाव लाने के उद्देश्य से इस अभियान की शुरुआत की। उन्होंने कहा—”मेरे लिए दृष्टि शुरू करना सिर्फ़ एक एनजीओ बनाना नहीं था, बल्कि यह हमारे आसपास हो रही स्थिति को बदलने की कोशिश थी। यह फिल्म इस बदलाव की दिशा में एक कदम है और मुझे खुशी है कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।”

“देखा क्या?” ने न केवल भारतीय सिनेमा को गर्व का पल दिया है, बल्कि समाज के उस अंधेरे को भी उजागर किया है जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। इस फिल्म की सफलता ने साबित कर दिया कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और परिवर्तन का सशक्त साधन भी है।

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